गोधरा में कारसेवकों से भरी हुई बोगी को फूंकने वाले फारुख भाणा को गुजरात ATS ने गिरफ्तार कर लिया, इसी ने रची थी ट्रेन जलाने की शाजिश

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अहमदाबाद- गुजरात एटीएस ने गोधरा में ट्रेन फूंकने के मुख्य आरोपी फारुख भांडा को आज गिरफ्तार कर लिया है | यह आरोपी पिछले 14 सालों से फरार चल रहा था | फारुख भांडा ही वो मुख्य आरोपी है जिसने गोधरा में ट्रेन जलाने का मुख्य आरोपी है | बता दें कि यह फारुख भांडा कांग्रेस का पूर्व नेता रह चुका है | जिस दिन गोधरा में ट्रेन को जलाया गया था जिसमें बैठकर कारसेवक जा रहे थे यह उसी दिन से फरार चल रहा था | पिछले 14 सालों से गुजरात एटीएस को इसकी तलाश थी |

पंचमहल जिले से गिरफ्तार किया गया –
बता दें कि फारुख भांडा जो कि पूर्व कांग्रेसी नेता रह चुका है को आज गुजरात एटीएस (एंटी ट्रेरिस्ट स्क्वाड) ने गुजरात के पंचमहल डिस्ट्रिक्ट के एक टोल प्लाजा से गिरफ्तार किया है | बता दें कि गोधरा भी इसी जिले के अंतर्गत आता है | इसने यही पर कारसेवकों से भरी ट्रेन को अपने कुछ समर्थकों के साथ आग के हवाले कर दिया था | जिसके बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क गए थे और इन दंगो में तकरीबन 1000 लोग मारे गए थे |

क्या हुआ था गोधरा में –

27 फरवरी 2002 केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और प्रदेश में भी केंद्र में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री थे पंडित श्री अटल बिहारी वाजपेई और उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे आज के भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी | एटीएस अधिकारीयों के अनुसार कथित तौर पर साबरमती एक्‍सप्रेस जलाने का मुख्‍य साजिशकर्ता था | उसने ही गोधरा रेलवे स्‍टेशन के करीब स्‍थ‍ित फूलन बाजार के अमन गेस्‍ट हाउस में मीटिंग रखी थी | एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, “भाना ने मीटिंग में कहा कि साबरमती एक्‍सप्रेस लेट होगी और वो सुबह दो बजे के बजाए सात बजे पहुंचेगी | वह उस साजिश का हिस्‍सा था, जिसके तहत गेस्‍ट हाउस पर मीटिंग के बाद साबरमती एक्‍सप्रेस को जलाने के लिए 140 लीटर पेट्रोल खरीदा गया |’ अधिकारियों के मुताबिक, भाना को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए स्‍पेशल इन्‍वेस्‍ट‍िगेशन टीम (SIT) को सौंपा जाएगा | एसआईटी ने ही इस मामले की जांच की है |

27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्‍सप्रेस के एस 6 कोच को गोधरा स्‍टेशन पर एक भीड़ ने आग के हवाले कर दिया | इसमें 59 लोग मारे गए | मारे गए लोगों में अधिकतर कारसेवक थे | एक दिन बाद, पूरे राज्‍य में सांप्रदायिक दंगे हुए | 2011 में स्‍पेशल कोर्ट ने इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया, जबकि 63 को बरी कर दिया गया | 11 को मौत की सजा हुई, जबकि 20 लोगों को उम्रकैद हुई | भाना इस मामले में फरार चल रहा था | दोषियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी थी | हाई कोर्ट में सुनवाई पिछले साल पूरी हो चुकी है और फैसला आना बाकी है |

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