जब कश्मीर में सरेआम हुए कश्मीरी पंडितों के साथ अनेकों बलात्कार, रातों रात मार दिए गए सैकड़ों पंडित

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kashmiri pandit

श्रीनगर – कश्मीर घाटी में जब से सेना ने कुख्यात आतंकी बुरहान वानी का इनकाउंटर किया है तभी से घाटी के हालातों में कोई स्थिरता नहीं दिखायी पड रही है | हालाँकि केंद्र और राज्य सरकार ने देशद्रोहियों के खिलाफ सख्ती से निपटने की ठान ली है | इस बीच एक बेहद गंभीर मसला और सामने आया है | मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया जा रहा है कि घाटी में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने जगह-जगह पर पोस्टर लगाये है और इस बात का एलान किया है कि कश्मीरी पंडित या तो घाटी छोड़ दें या फिर मरने के लिए तैयार हो जाये |

घाटी में जब मारे गए थे सैकड़ों पंडित हुआ था अनेकों महिलाओं का बलात्कार –
बता दें कि ऐसा नहीं है कि कश्मीर घाटी में कोई यह पहली बार हो रहा है | इससे पहले वर्ष 1990 में कश्मीर घाटी में अपने पैत्रक गाँवों में रहने वाले कश्मीरी पंडितों ने आतंक का वह भीषण और क्रूर चेहरा देखा है जिसकी यादें आज भी कैम्पों में रहने पर मजबूर उन मासूम कश्मीरी पंडितों के ज़हन में ताजा है |

ज्ञात हो कि वर्ष 1990 में जब भारत विकास की तरफ धीरे-धीरे अग्रसर हो रहा था और पूरा देश एकता के सूत्र में बंध कर आगे बढ़ रहा था उसी समय अचानक से पाकिस्तान की नापाक हरकतों ने और पाकिस्तानी आतंकियों ने कश्मीरी युवाओं को गुमराह कर अचानक से पूरी कश्मीर घाटी को आतंक की आग में झोक दिया | कश्मीर अचानक से जलने लगा, रातों-रात कश्मीरी युवाओं ने भारत माता के विरुद्ध जंग का एलान कर दिया और कश्मीर में लोगों को इस्लामी कानून मानने के लिए विवश कर दिया गया | इन्ही सालों में हजारों कश्मीरी महिलाओं का अपहरण किया गया, उनके साथ बलात्कार किया गया, मार दिया गया और कश्मीरी पंडितों को उनके अपने ही घरों को छोड़ने के लिए विवश कर दिया गया |

कश्मीरी पंडितों से कहा गया या तो मुसलमान बन जाओ या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ –
कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के ऊपर सबसे बड़ा कहर वर्ष 1989 में टूट पड़ा जब घाटी में जेहाद के लिए एक संगठन गठन किया गया ज़मात-ए-इस्लामी | इसी संगठन ने सबसे पहले घाटी में एक ड्रेस कोड लागू किया था | इसी संगठन ने पहली बार घाटी में नारा दिया था कि हम सब एक है तुम या तो घाटी छोड़ कर भाग जाओ या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ |

घाटी में कश्मीरी पंडितों के सुख और चैन का आखिरी दिन वह था जब सितंबर 14, 1989 भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और वकील कश्मीरी पंडित, तिलक लाल तप्लू की जेकेएलएफ ने हत्या कर दी | इसके बाद जस्टिस नील कांत गंजू की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस दौर के अधिकतर हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गयी |

उसके बाद घाटी में कश्मीरी पंडितों का रहना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया | बताया जाता है कि अनेकों महिलाओं के साथ सरेआम सामूहिक बलात्कार किये गए, अनेक कश्मीरी पंडितों की लड़कियों को अगवा कर लिया गया | जबरन कश्मीरी पंडितों की लड़कियों की शादी मुस्लिम लड़कों से करवाई जाने लगी और जब भी इसका कोई विरोध करता था तो उसे घाटी में बेरहमी से मार दिया जाता था | आये दिन कश्मीरी पंडितों के घरों के बाहर पर्चे चिपकाए जाते थे कि या तो घाटी छोड़ दो नहीं तो मारे जाओगे | अंत में अपने इलाके के बड़े-बड़े रईस कश्मीरी पंडितों ने रातों रात अपना सामान समेटा और घाटी छोड़कर कैम्पों में रहने के लिए विवश हो गए | तब से लेकर आज तक वे कश्मीरी पंडित जिनके अपने बड़े-बड़े घर हुआ करते थे अच्छा ख़ासा भरा पूरा परिवार हुआ करता था आज वे अपने ही देश में शरणार्थी शिविरों में रहने के लिए विवश हो गए है | तब से लेकर ज्यादातर कश्मीरी पंडित आज भी वही शरणार्थी शिविरों में ही रह रहे है |

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