देश में डॉक्‍टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने उठाये बड़े कदम

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1. सभी एमडी/एमएस विषयों में शिक्षक और छात्र अनुपात 1:1 से बढ़ाकर 1:2 कर दिया गया है और अनेस्थिसियोलॉजी, फॉरेंसिंक मेडिसन, रेडियोथेरेपी, मेडिकल आंकोलोजी और सर्जिकल आंकोलोजी विषयों में यह अनुपात 1:1 से बढ़ाकर 1:3 किया गया है।

2. शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए डीएनबी योग्‍यता को फैकल्‍टी के रूप में नियुक्ति हेतु मान्‍यता दी गई है।

3. एमबीबीएस स्‍तर की अधिकतम भर्ती क्षमता को बढ़ाकर 150 से 250 कर दिया गया है। 4. मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक/डीन/प्रिंसिपल/निदेशक के पदों के लिए नियुक्ति/विस्‍तार/पुनर्नियुक्ति के लिए आयु सीमा 65 से बढ़ाकर 70 कर दी गई है।

5. भूमि, फैकल्टी, कर्मचारी बिस्‍तर/बिस्‍तर संख्‍या और अन्‍य अवसंरचना की जरूरत के रूप में मेडिकल कॉलेज की स्‍थापना के लिए मानदंडों में छूट दी गई है।

6. नए पोस्‍ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों को शुरू करने/पोस्‍ट ग्रेजुएट सीटों को बढ़ाने के लिए राज्‍य सरकार मेडिकल कॉलेजों के सुदृढ़ीकरण/उन्‍नयन के लिए केंद्र और राज्‍य सरकारों में निधि की हिस्‍सेदारी बढ़ाकर 75:25 कर दी गई है।

7. देश के कम सेवा उपलब्‍ध जिलों में जिला/रैफरल अस्‍पतालों के उन्‍नयन द्वारा नए मेडिकल कॉलेज की स्‍थापना के लिए पूर्वोत्‍तर/विशेष श्रेणी के राज्‍यों में अनुपात 90:10 किया गया है जबकि अन्‍य राज्‍यों में यह अनुपात 75:25 है।

8. पूर्वोत्‍तर/विशेष श्रेणी राज्‍यों के लिए 90:10 के अनुपात में केंद्र सरकार और राज्‍यों में धन की हिस्‍सेदारी के साथ एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने के लिए राज्‍य सरकार और केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों के सुदृढ़ीकरण/उन्‍नयन के लिए प्रति एमबीबीएस के लिए ऊपरी सीमा बढ़ाकर 1.2 करोड़ रुपये कर दी गई है।

देश में फिलहाल एमबीबीएस की 56638 और पोस्‍ट ग्रेजुएट की 25346 सीटें उपलब्‍ध हैं। यह जानकारी आज राज्‍यसभा में केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री श्री जे पी नड्डा ने एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में दी।

source – PIB

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