नदियों के बहाव के साथ आई बालू की वजह से किसान खेती कर पाने में है असमर्थ

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जालौन (ब्युरो)- नदियों के बहाव के साथ आई बालू जो नदी के किनारे स्थित किसानों के खेतों में मोटी पर्त के रूप में जमा हो जाती है, जिससे किसानों का क्रषि कार्य बंद हो जाता है। ऐसे में बालू को या तो सरकार को अपने स्तर से हटवाना अन्यथा किसानों को प्रतिवर्ष उसका मुआवजा देना चाहिए। इस आशय की मांग पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीराम पाल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित करते हुए की।

पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीराम पाल ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रेषित करते लिखा कि प्राक्रतिक कारणों एवं अवैध खनन से नदियों की धार के बहाव में आए परिवर्तन के कारण नदियों के किनारे स्थित किसानों के खेतों में मौरंग की मोटी पर्त जमा हो जाती है। जिससे खेतों में क्रषि कार्य बंद हो जाता है। बालू खनन के क्षेत्र में सरकारी भूमि पर पड़ी बालू तो सरकारी खंडों की होती है।

जिन पर सरकार खनन के लिए पटटे देती है। परंतु किसानों की क्रषि भूमि पर बालू की मोटी पर्त होने पर उसको हटाने के लिए सरकार निजी भूमि मालिक किसानों को न तो पटटे देती है और न ही उन्हें स्वयं हटाने देती है। ऐसे में किसान खेती होते हुए भूमिहीन जैसी स्थिति में पहुंच जाता है। जिसके चलते किसान भुखमरी और बदहाली की स्थिति में पहुंच जाते हैं। यहां तक कि कुछ किसान आत्म हत्या तक करने पर मजबूर हो जाते हैं। फसल न उगा पाने की स्थिति में यदि किसान अपने खेतों में पड़ी बालू को अपने संसाधनों से बालू को उठाकर बेचने का प्रयास करते हैं तो उन्हें बालू चोर कहकर अपमानित किया जाता है।

बालू का खेल सरकारों में ‘की पोस्ट’ पर बैठे हुए अधिकारियों की आय का अकूत स्रोत बना हुआ है। तो वहीं बेचारा किसान दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर होता है। बुंदेलखंड के खनिज बाहुल्य क्षेत्रा में स्थित गांवों में व्याप्त गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, पलायन आदि को यदि सरकार रोकना चाहती है, तो सरकार को प्राथमिकता के आधार पर निजी भूमि मालिक किसानों को उनके खेतों में पड़ी बालू हटाने के लिए लीज पटटे देने चाहिए। अथवा सरकार को उनके खेतों से स्वयं बालू हटवाना चाहिए। ताकि किसान अपनी क्रषि भूमि पर फसलें उगा सकें। यदि ऐसा भी नहीं हो पाता है तो सरकार को किसानों द्वारा फसलें न उगा पाने की स्थिति में प्रतिवर्ष किसानों को उनके जीवकोपार्जन के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए।
रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव

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