पठानकोट हमले पर इंटरपोल कि मदद ले सकती है भारत सरकार

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नई दिल्ली – पठानकोट एयर बेस आतंकवादी हमले पर सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्धों को गिफ्तार करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों ने बहावलपुर जिले से कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। यह जिला प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का गृह नगर है।
इंटरपोल से मदद
वहीं, मोदी सरकार पठानकोट हमले की जांच में मदद के लिए इंटरपोल से मदद लेने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय के अनुसार बिना पहचान वाले शवों पर जानकारी हासिल करने के लिए एनआईए पठानकोट में मारे गये चार आतंकवादियों पर इंटरपोल का ब्लैक कार्नर नोटिस प्राप्त करेगी।
प्राप्त सूत्रों ने जानकारी में बताया कि एनआईए ने शव के कुछ हिस्से भी सीएफएसएल को भेजे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे शेष दो आतंकवादियों के हैं जो सुरक्षाबलों के साथ 80 घंटे तक चली मुठभेड़ में शामिल थे। एक प्रवक्ता ने बताया कि एनआईए की 10 सदस्यीय एक टीम का खोज अभियान पंजाब में जारी है।
एके 47 की मैगजीन, फोन और दूरबीन मिले
पठानकोट एयर बेस ठिकाने से एके 47 की मैगजीन, मोबाइल फोन और दूरबीन मिले हैं। एनआईए की टीम समूचे पंजाब में काम कर रही है और गवाहों से पूछताछ कर रही है तथा मुठभेड़ स्थल और ठिकाने के बाहर खोज अभियान चला रही है।

पाकिस्तानी सरकारी चैनल ने खबर दी है कि इस सिलसिले में कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं लेकिन पुलिस ने पठानकोट हमले के सिलसिले में कोई पुष्टि नहीं की। चैनल ने खबर दी, पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर हमले के सिलसिले में भारत की तरफ से मुहैया कराए गए साक्ष्यों के आधार पर खुफिया एजेंसियों ने बहावलपुर से कुछ संदिग्धों को उठाया है और पूछताछ के लिए उन्हें अज्ञात स्थान पर ले गई है। रीजनल पुलिस ऑफिसर अहसान सिद्दिकी ने कहा कि पठानकोट हमले से जुड़ी किसी गिरफ्तारी के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, पठानकोट घटना से जुड़ी किसी गिरफ्तारी के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
इस्लामाबाद के खुफिया अधिकारियों ने दावा किया कि गुजरांवाला, झेलम और बहावलपुर जिले में छापेमारी की गई और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा, जांच की जा रही है कि क्या वे हमले में शामिल थे या उनमें से कुछ ने हमले में सहयोग किया। पठानकोट आतंकवादी हमले के षड्यंत्रकारियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के लिए अमेरिका की तरफ से आए दबाव के बाद प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हमलावरों के पाकिस्तान से जुड़े होने के बारे में जांच के लिए हाईप्रोफाइल संयुक्त जांच दल (जेआईटी) के गठन का आदेश दिया है। भारत की तरफ से साक्ष्य मुहैया कराने के बाद शरीफ ने जेआईटी के गठन की घोषणा की।
भारत पाक वार्ता रोकी जा सकती है
15 जनवरी को होने वाली भारत पाकिस्तान विदेश सचिव स्तर की वार्ता को हमला करने वाले आतंकवादियों के खिलाफ इस्लामाबाद की निर्णायक कार्रवाई से जोड़ दिया है। अखबार ने दावा किया कि हाल में शरीफ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में जेआईटी के गठन की घोषणा हुई, जिसमें इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी), इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) मिलिट्री इंटेलीजेंस (एमआई) के अधिकारी शामिल हैं।
हमलें में मसूद अजहर का हाथ
भारत ने हमले के सरगना के रूप में मसूद अजहर की पहचान की है। भारत ने उसके भाई रउफ और पांच अन्य पर हमला करने का आरोप लगाया। दो जनवरी को हुए हमले में सभी छह आतंकवादी मारे गए थे और सात भारतीय सैनिक शहीद हो गए। इसने वायुसेना अड्डे के हमलावरों द्वारा पाकिस्तान में जिन नंबर पर फोन किया गया वह नंबर और अन्य जानकारियां मुहैया कराई हैं।
वार्ता से पहले पाक आतंकियों पर कार्रवाई करें
भारत ने इस्लामाबाद से कहा कि अगर वह 15 जनवरी को विदेश सचिव स्तर की वार्ता से पहले पाकिस्तान आतंकियों पर कार्रवाई करे। लाहौर से 400 किलोमीटर दूर बहावलपुर में अजहर की सेमिनरी उस्मान अउ अली पूरी तरह कार्यशील है और भवन में विस्तार करने के साथ ही छात्रों की संख्या 400 से बढक़र 700 हो गई है।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘पठानकोट घटना के सिलसिले में सेमिनरी में कोई छापेमारी नहीं हुई।’ जैश ए मोहम्मद को 2002 में प्रतिबंधित कर दिया गया। बहरहाल वह ‘जमात उल फुरकान’ के नाम से काम करता रहा। द न्यूज ने बताया कि पाकिस्तान ने आतंकवादी हमले की शुरुआती जांच को पूरा कर लिया है और भारतीय अधिकारियों को रिपोर्ट सौंप दी है। भारत की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। एक अखबार ने पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि भारत की तरफ से दिया गया टेलीफोन नंबर पाकिस्तान में पंजीकृत नहीं है।
पाक प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि विदेश सचिव स्तर की वार्ता ‘समय पर ही होगी’ क्योंकि ‘पाकिस्तान पठानकोट हमलें की जांच कर रहा है।’

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