मंजिले उनको मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती हैं, जानिए क्या हैं इसका राज …?

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  • मंजिले उनको मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती हैं !
    अरे !! पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती हैं !!

यह जुमला 65 वर्षीय बौद्ध भिक्षु छुलटिम छोंजोर पर एकदम फिट बैठता है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सामरिक महत्व के मनाली-लेह मार्ग के बर्फ से अकसर बंद रहने के चलते इस महान बौद्ध भिछु ने वैकल्पिक मार्ग पदुम-शिंकुला-दारचा सड़क को खुद ही बनाने की ठान ली थी।

मंजिले उनको मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती हैं

शून्य से कई डिग्री नीचे के तापमान में कार्य करना इतना आसान नहीं था लेकिन इस महान ब्यक्ति के बुलंद हौसलों ने आखिर कर दिखाया और अपनी मंजिल तक पहुँच ही गए इनके कदम थोडा धीरे और कठिनाई के साथ ही सही पर पहुँचे तो …

तीन वर्ष की भीषण मेहनत और अपनी पूरी की पूरी जमा पूँजी खर्च करने के बाद 65 वर्षीय बौद्ध भिक्षु छुलटिम ने 13 किलो मीटर लम्बा मार्ग बना डाला, 65 वर्षीय बौद्ध भिक्षु ने इस सड़क को बनाने में बड़े से बड़े बर्फीले चट्टान को भी काट कर फेंक दिया और आगे बढ़ गए

किसी ने सच ही कहा हैं कि – जिनके हौसलें बुलंद होते हैं, चट्टानें भी उनका रास्ता नहीं रोक पाती …

सड़क इतनी चौड़ी हैं कि एक जीप आराम से निकल सकती हैं, धन्य हैं भारत भूमि, धन्य हैं आप

सच कर दिखाया इस महापुरुष ने …..

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