संसद या फिर बच्चों का खेल, तू मेरा नहीं, मैं तेरा नहीं !

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http://gncmproduction.com/library/panasonic-katalog-konditsionerov.html panasonic каталог кондиционеров संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से ही प्रारंभ हो चुका हैं और आज 31 जुलाई की तारीख़ हो चुकी हैं लेकिन संसद में काम के नाम पर ढेला भर चीज भी इधर से उधर नहीं हुई हैं I रोजाना देश के सभी माननीय सांसद संसद की कुर्सियों पर आकर बैठ जाते हैं और जैसे ही बात किसी काम को आगे बढाने की होती हैं सभी सांसद ऐसा लगता हैं जैसे की किसी कक्षा में एक ही साथ देश के सभी उदंड विद्यार्थियों को बैठा दिया गया हो और जो अध्यापक हैं वह इतना कमजोर और असहाय हैं की इन निरंकुश विद्यार्थियों पर अंकुश लगाने में समर्थ नहीं हैं I अंततः हर रोज अध्यापक को क्लास को ही समाप्त का छुट्टी की घोषणा करनी पड़ जाती हैं I

рецепты диетического питания при заболеваниях संसद में आजकल पूरा का पूरा विपक्ष केवल और केवल एक ही मुद्दे पर बात करता हुआ नज़र आ रहा हैं कि ललित गेट में फंसी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वशुंधरा राजे सिंधिया तथा अब तक 30 से अधिक लोगों को अपनी आगोश में समाहित कर लेने वाले चर्चित व्यापम नामक घोटाले में फंसे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब तक अपने पदों से स्तीफा नहीं दे देते तब तक हम संसद नहीं चलने दे सकते हैं I

http://javaarchitectsenior.com/owner/zaryadnoe-ustroystvo-orion-150-shema.html зарядное устройство орион 150 схема विपक्ष का इस बात से कोई मतलब नहीं हैं कि कौन सा बिल देश की जनता के लिए कितना आवश्यक हैं और उस एक बिल के पास हो जाने से देश की जनता को कितना लाभ मिल सकता हैं इसकी बात तो कोई करने के तैयार ही नहीं हैं वहां अगर बात होती हैं कोई तो वह स्तीफे की I

http://www.maljohn.com/library/skolko-stoit-otsenit-avtomobil-dlya-nasledstva.html сколько стоит оценить автомобиль для наследства विपक्ष से जब इस बात पर सवाल पूछा जाता हैं कि आखिर स्तीफे की इतनी बड़ी जिद क्यों ? आखिर क्यों बिना किसी मतलब के संसद में रोजाना बिना किसी काम के करोंडो रूपये यूँ ही बर्बाद कर दिए जा रहे हैं ? आखिर यह पैसे जिस जनता की जेब से आते हैं उसके बारे में कुछ बात तो करिए ! सरकार बात करने के लिए तैयार हैं तो उसे अपना पक्ष रखने दीजिये अगर आप तब भी न संतुष्ट हो तब स्तीफे की बात करियेगा I तो ऐसे में विपक्ष के नेताओं का जवाब सुनकर हँसी आ जाती हैं वह बिलकुल वैसा बयान देते हैं कि जैसे –

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http://datacleansing.ru/library/harakteristiki-radiatora-vaz-2109.html характеристики радиатора ваз 2109 जैसे स्कूल में किसी छोटे से बच्चे के पैर पर एक दूसरा बच्चा पैर रख देता हैं तो दूसरा बच्चा कहता हैं कि अब तो मैं भी बदला लूँगा I तूने मेरे पैर पर अपना पैर रखा हैं मैं भी तेरे पैर पर अपना पैर रखूंगा II

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расписание намазов март 2017 москва संसद में विपक्ष के नेताओं का कहना हैं कि जब भाजपा विपक्ष में थी तब भाजपा के नेताओं ने भी तो ऐसा ही किया था I जब तक वह हमसे स्तीफा नहीं ले लेते थे तब वह भी तो संसद नहीं चलने देते थे तो जब आज हम भी वैसा ही कर रहे हैं तो इसमें गलत क्या हैं ?

http://frantzmotorinn.com/library/oboykin-katalog-oboev-foto.html обойкин каталог обоев фото आज सभी सांसदों ने मिलकर संसद को अपनी राजनीति चमकाने का अड्डा बना दिया हैं इसके अलावा कुछ और नहीं I उन्हें ऐसा लगता हैं कि हम संसद नहीं चलने देंगे तो यह हमारी जीत होगी ! लेकिन शायद वह अपनी इस छोटी सी जीत के चक्कर में उस जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को पूरी तरह से भूल चुके हैं आज जिसकी वजह से वह देश के इस सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर में खड़े होने की हैसियत रखते हैं I उस जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को भूल जाते हैं जिसने आज उन्हें बोलने लायक बनाया हैं I

korzeniowskiego 28 52 на карте гданьска संसद में पिछले 10 दिनों से जारी गतिरोध के चक्कर में 11 बिलों पर सुनवायी की जानी शेष हैं और लगभग 9 नये बिलों को संसद में पेश करना भी बाकी हैं I और इन बिलों पर चर्चा करने से बेहतर विपक्ष को तीन लोगों के स्तीफे की ज्यादा आवश्यकता जान पड़ती हैं I आज देश की संसद की यह हालत देखकर ऐसा लगता हैं जैसे की सवा सौ करोंड की आबादी के हितों की अपेक्षा विपक्ष का सत्ता पक्ष से बदला लेना अधिक महत्त्वपूर्ण हैं I

как ухаживать за волосами чтобы они быстрее अरे देश की मासूम जनता के नुमाइंदों देश की जनता ने आपको संसद में इस लिए नहीं भेजा हैं कि आप वहां पर बैठकर विपक्ष और सत्ता के बीच अदले-बदले के खेल खेलें, बल्कि इसलिए भेजा हैं कि आप हमारे हितों में आ रही हर प्रकार की रूकावट का डट कर सामना करेंगे और हमें आगे बढ़ने की एक सही दिशा दिखायेंगे I

мягкая книжка своими руками выкройки संसद को चलने दीजिये ज़नाब ! जिस किसी ने कोई अपराध किया हैं उसे बोलने का मौका तो दीजिये अगर आप संतुष्ट न हो तब स्तीफे की बात करियेगा I और अगर आपको फिर भी संतोष नहीं हैं तो शिवराज सिंह चौहान के मामले में तो देश की सर्वोच्च जांच एजिंसी देश की सर्वोच्च न्यायालय की देख–रेख में जांच कर रही हैं I आपको उस पर भरोषा तो करना ही पड़ेगा I

http://solvaracing.hu/owner/pervie-priznaki-alkogolnogo-gepatita.html первые признаки алкогольного гепатита अगर आप यह कहते है कि किसी मंत्री के पद पर बने रहने पर देश की सर्वोच्च जांच एजिंसी और देश की सर्वोच्च न्यायालय भी ठीक से जांच नहीं कर पाएगी तो यह बात तो आपके कार्यकाल पर भी प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं I और ज़नाब, आपका यह अविश्वास पूरे के पूरे देश के भरोसे को आहत कर देगा I क्योंकि हर तरफ से ठुकराये और सताये लोगों का आज भी इस देश की इस सर्वोच्च जांच एजिंसी और देश की सर्वोच्च न्यायालय पर विश्वास कायम हैं I उन्हें ऐसा लगता हैं कि अगर जांच यह करेगी और न्याय यह देगी तो इस में रत्ती भर भी शक की कोई गुंजाईश नहीं है और सच यही है I

магазин икеа в новосибирске каталог товаров мебель इसलिए मेरे देश के महान नेताओं जनता का विश्वास तो मत तोड़ो, भले ही यह एक भ्रम ही क्यों न हो इसे बना रहने दें I आप सभी की महान कृपा होगी I

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