सुप्रीम कोर्ट : पोर्न साइट्स पर बैन व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन

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इंदौर के वकील कमलेश वासवानी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी  जनहित याचिका में सभी पोर्न साइट्स को ब्लॉक करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया  “जब तक गृह मंत्रालय इस पर कोई कदम नहीं उठाता, तब तक सभी पोर्न साइट्स को ब्लॉक करने का अंतरिम आदेश जारी किया जाए।” याचिकाकर्ता के वकील विजय पंजवानी ने दलील दी कि बच्चों और महिलाओं के ज्यादातर अपराध पोर्न वीडियो से प्रभावित होकर किए जाते हैं।

पोर्न

जिस पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारत में तमाम पोर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा  ‘‘इस तरह का अंतरिम आदेश कोर्ट द्वारा नहीं दिया जा सकता। कोई भी कोर्ट आकर यह कह सकता है कि मैं एक एडल्ट हूं और आप मुझे मेरे कमरे के भीतर पोर्न देखने से कैसे रोक सकते हैं? यह संविधान के आर्टिकल 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। हालांकि, यह एक सीरियस मुद्दा है और कुछ कदम उठाए जाने चाहिए। देखते हैं कि केंद्र इस मसले पर क्या कदम उठाता है?’’ कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस बारे में डिटेल एफिडेविट सौंपने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है।

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