सड़कों पर मिटटी के बर्तन बेचने पर मजबूर है महिला कबड्डी टीम की गोल्ड मेडलिस्ट कप्तान

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हरयाणा महिला टीम की कप्तान निर्मला पुरी (फोटो क्रेडिट- अमर उजाला)
हरयाणा महिला टीम की कप्तान निर्मला पुरी (फोटो क्रेडिट- अमर उजाला)

आजकल पूरी दुनिया के खिलाड़ी रियो ओलंपिक में अपना जौहर दिखाने के लिए उतरे हुए है | कई देशों ने बेहद उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है इस बार ओलंपिक में लेकिन भारत को पूर्णतः इस बार निरासा का ही सामना करना है | दरअसल आपको बता दें कि भारत को अभी तक ओलंपिक में एक भी गोल्ड नहीं मिल सका है | ज्यादातर खिलाड़ी बिना किसी मेडल के ही वापस आ रहे है |

ऐसे में सवाल यह उठता है कि एक तरफ जहां हम क्रिकेट की दुनिया में सबसे बेहतरीन टीम है वही ओलंपिक में आखिर ऐसा क्या हो जाता है कि हमारे खिलाड़ियों के पैर उखड जाते है | आखिर इसके पीछे क्या कारण हो सकते है ? जब हमने समस्या के पीछे का कारण जानने की कोशिश की थी बेहद चौकाने वाला एक मामला हरियाणा से सामने आया है |

हरियाणा की एक बेहद ही होनहार स्टेट लेवल चैम्पियन और महिला कबड्डी टीम की कप्तान जो कि गोल्डमेडलिस्ट भी आजकल सड़कों के किनारे मिटटी के बर्तन और खिलौने बेचने पर मजबूर है | दरअसल आपको बता दें कि चरखी दादरी के प्रजापति मोहल्ले में रहने वाली निर्मला पुरी के पास इतने भी पैसे नहीं है कि वे वे आगामी 24 अगस्त से तमिलनाडु में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपने प्रदेश का नेत्रत्त्व भी कर सके |

सड़क के किनारे मिटटी के बर्तन बेचती हुई गोल्डमेडलिस्ट महिला टीम की कप्तान (फोटो क्रेडिट अमर उजाला )
सड़क के किनारे मिटटी के बर्तन बेचती हुई गोल्डमेडलिस्ट महिला टीम की कप्तान (फोटो क्रेडिट अमर उजाला )

ऐसा इसीलिए क्योंकि इन राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को को भी सरकारी मदद नहीं दी जाती है | इन्हें जहां भी खेलने के लिए जाना होता है उसका सारा खर्चा खुद ही वहन करना पड़ता है | और इस गोल्डमेडलिस्ट खिलाड़ी का परिवार इतना पैसे वाला नहीं है कि वह अपनी बेटी को खेलने के लिए इतना अधिक पैसा लगाकर भेज सकें |
बता दें कि ऐसा नहीं है कि यह कोई पहला मौका है जब निर्मला पुरी को निराशा का सामना करना पड़ा हो इससे पहले आर्थिक तंगी के कारण सोनीपत में हो रही महिला कब्बड्डी प्रतियोगिता में भी वो हिस्सा नहीं ले पायी थी | आपकी जानकारी के लिए हम आपको यह भी बता दें कि पिछले दिनों निर्मला पुरी ने महाराष्ट्र में आयोजित इंडियन रूरल गेम्स में हरियाणा की टीम का नेत्रत्त्व किया था न केवल नेत्र्तत्व किया था बल्कि हरियाणा की टीम को गोल्ड मेडल भी दिलवाया था |

निर्मला के पिता सड़क किनारे फलों की रेहड़ी लगाते है जबकि उनकी माता रोज गार्डन के पास फुटपाथ पर मिटटी के बर्तन और खिलौने बेचती है | निर्मला भी जब भी घर पर रहती है वे भी अपनी माँ के साथ उनके काम में मदद कर चार पैसे कमाने का प्रयास करती है | हरियाणा महिला कबड्डी टीम की कप्तान निर्मला पुरी का कहना है कि एक तरफ तो भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय खिलाडियों को पदक जीतने के पहले ही लाखों रूपये की आर्थिक मदद देती है जबकि वही हम राष्ट्रीय स्तर के खिलाडियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एंट्री फीस तक की भी सुविधा नहीं दी जाती है | उन्होंने यह भी बताया है कि हाल ही में आयोजित एक प्रतियोगिता के दौरान भगा लेने वाले खिलाडियों से 5-5 हजार उपये की एंट्री फीस भी ली गयी थी |

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