19 सदस्यीय टीम के बावज़ूद भी विंध्याचल मंदिर की व्यवस्था जर्जर

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विंध्याचल/मिर्ज़ापुर (ब्यूरो)- आस्था केंद्र माँ विंध्यवासिनी धाम जहां हजारो की संख्या में प्रतिदिन दर्शनार्थी अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने आते है। यहां सैकड़ो वर्षो से यात्रियों का आना जाना लगा रहता है। इसी को देखते हुए 1952-53 में श्री विंध्य पंडा समाज नाम की संस्था का गठन किया गया जो मंदिर और यात्रियों की व्यवस्था के लिए काम करेगी और यह संस्था काम भी कर रही है, कालांतर में भीड़ बढ़ने के कारण और अधिक व्यवस्था की आवश्यकता हुई तो 1982-83 में तत्कालीन जिलाधिकारी प्रशांत कुमार मिश्रा के देख रेख में विंध्य विकास परिषद की स्थापना की गई जिसमें अध्यक्ष जिलाधिकारी उपाध्यक्ष एसपी सचिव सिटी मजिस्ट्रेट के अलावा चार और सरकारी अधिकारी शामिल है और पंडा समाज से दस शामिल है, दो जिलाधिकारी मनोनीत करते है कुल मिलाकर 19 सदस्यीय टीम मंदिर पर काम करती है।

विंध्यवासिनी मंदिर, कालीखोह, अष्ठभूजा यह तीनों मंदिरों की जिम्मेदारी विंध्य विकास परिषद के जिम्मे है। बावजूद मंदिर की व्यवस्था दयनीय है। अखबारों की सुर्खियां बनने के लिए कागज पे तो कई काम होता है लेकिन धरातल पर सब शून्य है। यात्रियों की सुविधा के लिए धन की भी आवश्यकता होगी इसपर पंडा समाज ने तीनों मंदिरों में 9 दानपात्र परिषद का रखवाया ताकि आर्थिक कमी न आ सके यात्रियों के सुख सुविधा मुहैया कराने में लेकिन लाखो करोड़ो रूपये दानपात्रों से परिषद हर वर्ष ले जाता है।

82-83 से अबतक का कोई लेखा जोखा नही है। करोड़ो रूपये बैंक में जमा है जो यात्रियों का ही है लेकिन उनकी सुख सुविधा पर कोई खर्च नही होता। उन रुपयों का आजतक कोई अतापता नही। पुरोहितों की माने तो अगर इसकी गंभीरता से जांच हो तो करोड़ो रुपयों का घोटाला सामने आ जायेगा। और उच्च अधिकारी जांच के घेरे में आएंगे।

पुरोहितों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जबकि कई बार लिखित रूप से आय व्यय मांगने पर भी नही दिया जाता। आरटीआई के माध्यम से भी मांगने पर कहा गया की कुछ नही है, अब इस ईमानदार सरकार में यात्रियों को न्याय जरूर मिलेगा ऐसा पुरोहितों का मानना है।

रिपोर्ट- मोहित मिश्रा

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