जब भारतीय सैनिकों ने लाहौर तक मचा दी भीषण तबाही, और पूरी पाकिस्तानी सेना का कर दिया विध्वंश..

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1965 के युद्ध को समाप्त हुए 50 वर्ष पूरे हो चुके है और भारत की पाकिस्तान के ऊपर दूसरी शानदार विजय के भी इसी के साथ ही 50 वर्ष से भी अधिक पूरे हो चुके है, दरअसल पाकिस्तान के आक्रमण के पीछे सबसे बड़ी वजह यह थी कि पाकिस्तान भारत को उस समय राजनैतिक पर और सैन्य शक्ति के तौर पर कमजोर समझने की गलती कर बैठा था I

भारत के सबसे प्रभावशाली नेता समझे जाने वाले जवाहरलाल भी अब नहीं रहे थे और उसके सामने पाकिस्तान ने अमेरिका, रूस और चीन से अत्याधुनिक हथियार तथा अमेरिका से सैबर जेट विमान तथा अमेरिका के नेट टैंक हासिल कर लिए थे जिन्हें युद्ध के मैदान में अपराजय समझा जाता था, और इसी सब को देकते हुए [पाकिस्तान ने इसे आक्रमण का अशी अवसर samjha और भारत पर आक्रमण कर दिया |

तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान के आक्रमण की कहबर सुनते ही कहा कि अब हम पाक के आक्रमण का जवाब अपने हथियारों से ही देंगे और सेना को इस आक्रमण का उचित जवाब देने को कहा |

पाकिस्तान के इस आक्रमण के जवाब में भारतीय वीरों ने 28 अगस्‍त को पाकिस्‍तान में दाखिल होकर हाजी पीर और दूसरी पोस्‍ट पर कब्‍जा कर लिया, 1 सितंबर 1965 को पाकिस्‍तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्‍लैम लॉन्‍च कर जंग का स्‍तर और बढ़ा दिया और 6 सितंबर 1965 भारत ने लाहौर और सियालकोट को निशाना बनाकर सरहद पार बड़े हमले कर जवाब दिया.

22 सितंबर 1965 भारतीय सैनिकों द्वार की जा रही तबाही से घबराकर पाक संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की शरण में जा बैठा, जिसके बाद दोनों मुल्‍कों के बीच संघर्ष विराम हुआ |

इस युद्ध में 2862 भारतीय सैनिक और 5800 पाकिस्‍तानी फौजियों की जान गई, 97 भारतीय टैंक और 497 पाक्स्तिानी टैंक बर्बाद हो गए, 1900 वर्मकिमी पाकिस्‍तानी इलाका भारत ने जीता, जबकि पाकिस्‍तान के हाथ 540 वर्ग किमी आया |

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