उपनिबंधन कार्यालय में 2% होती है धन उगाही

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प्रतीकात्मक फोटो

मड़ियाहूँ/जौनपुर (ब्यूरो) : देश के प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनाव की रैली में जनता को सम्बोधित करते हुये प्रदेश की जनता को विश्वास दिलाया था कि उ0प्रदेश से नजराना, सुकराना, जबराना, हकराना, को पूरी तरह समाप्त कर स्वच्छ प्रशासन दिया जायेगा पर प्रदेश में भाजपा की सरकार बने एक माह हो गये, पर मौजूदा सरकार उपनिबंधन कार्यालय में 2% लिये जा रहे नजराना को कब बंद करेगी। जो दिन के उजाले में खुले आम जबराना ढंग से क्रेता से नजराना वसूला जा रहा है, और जनता इस कुपोषण व्यवस्था का शिकार हो रही है। ऐसा नहीं है कि इस व्यवस्था की जानकारी शासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है, पर वो भी मूकदर्शक बने हुये हैं | क्योंकि इसमें अधिकारियों का लाभ समाहित है ।तो इसे खत्म क्यों करेंगे।

जनता पिसती है तो पिसे इन्हें इससे क्या लेना देना है। इस नजराना का दंश तो सभी को झेलना पड़ता है।पर सत्ता के असरदार लोगों से ये रसूख छोड़ दिया जाता है।और इससे कम असरदार लोगों से एक % की छूट दी जाती है, और आम लोगों से बदस्तूर 2% की वसूली की जाती है। आखिर ये सिलसिला कब तक चलेगा ? क्या वर्तमान भाजपा सरकार प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक इस वर्षों पुरानी चली आ रही नजराना व्यवस्था को समाप्त करेगी । जो रिश्वत लेने का नायाब तरीका है। इस सम्बंध में पूर्व बारएसोसिऐसन के अध्यक्ष बिरेन्द्र सिंह गौतम का कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को नजराना व्यवस्था तत्काल खत्म करनी चाहिये । अधिवक्ता संतोष सिंह का कहना है इस पुरानी व्यवस्था जो नजराना के नाम पर रिश्वत ली जाती है इसे बंद करना चाहिये।अधिवक्ता छोटेलाल पटेल ने कहा प्रदेश सरकार को वर्षों से चली आ रही नजराना व्यवस्था को बंद करनी चाहिये जिससे आमजनमानस को सरकार की पारदर्शिता दिखाई दे सके कि कथनी और करनी में अन्तर नहीं है।

रिपोर्ट – अमित कुमार पाण्डेय

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