तीन वर्ष की अवधि के लिए 21वें भारतीय विधि आयोग का गठन

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में सम्‍पन्‍न मंत्रिमंडल की बैठक में 21वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी दी गई, जिसका कार्यकाल 1 सितम्‍बर, 2015 से 31 अगस्‍त, 2018 तक, यानी तीन वर्षों का होगा।

21वें विधि आयोग में निम्‍नलिखित पदाधिकारी होंगे-

i. पूर्णकालिक अध्‍यक्ष

ii. चार पूर्णकालिक सदस्‍य (1 सदस्‍य-सचिव सहित)

iii. वैधानिक कार्य विभाग के सचिव पदेन सदस्‍य के रूप में

iv. अंशकालिक सदस्‍य, जिनकी संख्‍या 5 से अधिक नहीं होगी

विधि आयोग केंद्र सरकार द्वारा उल्लिखित या स्‍वमेव आधार पर विधि संबंधी अनुसंधान करेगा और भारत में मौजूदा कानूनों की समीक्षा करेगा ताकि उनमें सुधार किया जा सके और नए कानून लागू किए जा सकें। इसके अलावा प्रक्रियाओं में देरी को दूर करने, मुकदमों के जल्‍द निपटाने और मुकदमे के खर्चों में कमी इत्‍यादि संबंधी न्‍याय प्रणाली में सुधारों के लिए अध्‍ययन और अनुसंधान करेगा।

विधि आयोग के अन्‍य कामों में निम्‍नलिखित सम्मिलित हैं-

1. जो कानून प्रासंगिक नहीं रहे उनकी पहचान करना और बेकार तथा अनावश्‍यक कानूनों को रद्द करने की सिफारिश करना।

2. नीति निर्देशक तत्‍वों के क्रियान्‍वयन के लिए आवश्‍यक नए कानूनों को लागू करने के संबंध में सुझाव देना और संविधान की प्रस्‍तावना में व्‍यक्‍त उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करना।

3. कानून और न्‍यायिक प्रशासन से संबंधित विषयों पर सरकार को अपने दृष्टिकोण से अवगत कराना, जिन्‍हें विधि एवं न्‍याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग के जरिए सरकार द्वारा उल्लिखित किया गया हो।

4. केंद्र सरकार को अपने द्वारा विचार किए गए सभी मुद्दों, विषयों, अध्‍ययनों और अनुसंधान पर केंद्र सरकार को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्‍तुत करना और इन रिपोर्टों के ऊपर कार्रवाई करने के लिए केंद्र और राज्‍य को सुझाव देना।

5. इसके अलावा समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अन्‍य कार्यों को पूरा करना। सुझावों के पूर्ण करने के पहले विधि आयोग नोडल मंत्रालय/विभागों के साथ विमर्श करेगा। इसके अलावा इस उद्देश्‍य के लिए आवश्‍यक समझे जाने पर आयोग हितधारकों से भी सलाह करेगा।

News Source – PIB

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