24 घण्टे बाद भी नही मिली बेटे को पैरोल तो हार मानकर परिवार को करना पड़ा अंतिम संस्कार

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प्रतीकात्मक फोटो
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ताराजीवनपुर/चंदौली- जिले में एक परिवार के सामने अजीबोगरीब मंजर देखने को मिला, परिवार के घर में पिता की लाश रखी और जेल में बंद बेटों का अंतिम संस्कार के लिए इंतजार हो रहा था, मगर आचार संहिता व चुनाव में प्रशासन कि कमी कि वज़ह से बेटे कों पैरोल नहीं मिल सका अंत में हार मानकर परिजनों ने कैली घाट पर पिता का अंतिम संस्कार कर दिया |

आपको बता दें कि हत्या के आरोप में बेटा सहित नाती व मामा जेल में बंद हैं, इधर पिता की ह्दयगति रुकने से मौत हो गई | घर में कोई और नहीं है जिससे अंतिम संस्कार हो सके| परिजन पहले थाने और डीएम दफ्तर का चक्कर लगाते रहे ताकि पेरोल पर अंतिम संस्कार के लिए उनके बेटे यहां आ सकें सफलता जिलाधिकारी चंदौली के यहा से तो मिल गई मगर जिला कारागार वाराणसी जेल अधीक्षक ने पुलिस प्रशासन की कमी कि बात कहके पेरोल पर बेटे को रिहा करने से मना कर दिया |

आखिर में परिवार वालों कि सारी उमीदें ध्वस्त हो गई और हार मानकर परिजनों ने कैली घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया| प्राप्त जानकारी के मुताबिक सदर कोतवाली क्षेत्र के डेवढ़िल गांव में 8 मई सन् 2011 में तिहरा हत्याकांड में गांव निवासी गौरीशंकर तिवारी के पुत्र धनंजय व धर्मेंद्र पिंटू सहित मामा कोमल तिवारी निवासी रौना कोतवाली मुग़लसराय आरोपी थे, वे तीनों लोग जेल में बंद हैं| शुक्रवार को गौरीशंकर तिवारी का निधन हो गया| घर में कोई पुरुष सदस्य न होने के कारण शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका था घर के सदस्य उनके पुत्र को पेरोल पर छुड़ाने के लिए जिलाधिकारी से मिले तो पहले जिलाअधिकारी ने सीओ सदर प्रमोद यादव को मौके का मुआयना करने के गांव भेजा |

तहकीकात करने के बाद जिलाधिकारी ने पेरोल के लिए आदेश दे दिया मगर जेल प्रशासन की कमी कि वजह से पेरोल पर बेटे को नहीं छोड़ा जा सका | वहीं गौरीशंकर के निधन और पुत्र के जेल में बंद होने के कारण परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है| धनंजय की पत्नी मंजू देवी ने बताया घर में पुरुष सदस्य न होने से शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका| वह पति को पेरोल पर छोड़ने के लिए शुक्रवार को जिलाधिकारी से मिली थीं| मगर शनिवार सुबह तक परिजनों को आस थी कि बेटा बाप का अंतिम दर्शन कर लेगा मगर क़ानूनी पचड़ा बेटा क़ि अंतिम ख्वाब पर पानी फेर गया।
रिपोर्ट-तलवार सिंह

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