राज्यसभा में एक के बाद धडा-धड पास हुए तीन बिल |

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A policeman keeps vigil at the parliament house in New Delhi February 26, 2005. REUTERS/B Mathur/Files
                                                 Photo Courtesy – yuyellowpages

पिछले कई दिनों से लगतार स्थगित होने के बावजूद राज्यसभा में सोमवार दोपहर दो बजे सदन की बैठक फिर शुरू होते ही मिनटों के भीतर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक 2015 सहित तीन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई तो इस बात की आशंका बनी हुई थी कि कहीं सदन की कार्यवाही फिर से स्थगित ना हो जाए क्योंकि विपक्ष ने पूरक कार्य सूची के जरिए किशोर न्याय विधेयक लाने के सरकार के कदम की निंदा की थी। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने इस पर यह कहकर आपत्ति जताई थी कि सत्तारूढ़ पार्टी खुद ही मुद्दे को जटिल बना रही है।

उन्होंने कहा- हम साफ कर चुके हैं कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक को हम पारित करना चाहते हैं। सर्वदलीय बैठक में मैंने कहा था कि किशोर न्याय विधेयक प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह आज के एजंडे में नहीं था परंतु मीडिया की खबरों की वजह से सरकार अब इसे पूरक कार्य सूची में लाई है। यह केवल जनता के बीच विपक्ष को यह कहते हुए बदनाम करने का प्रयास है कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद हमने इसे प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा कि मामला मंगलवार को लिया जा सकता है। इसे कार्यसूची में पहले नंबर पर सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।

आजाद ने कहा- यह केवल इसलिए किया जा रहा है ताकि मीडिया और जनता हमारी आलोचना करे। इसके बाद राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक 2015 को लिया। इसे बिना किसी चर्चा के सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई कुछ संशोधनों के लिए प्रस्ताव लाने पर आगे नहीं बढ़े क्योंकि उनकी पार्टी ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था।

विधेयक पारित होने पर सदस्यों ने मेजें थपथपाकर खुशी व्यक्त की। इसके बाद विनियोग (संख्या 4) विधेयक 2015 और विनियोग (संख्या 5) विधेयक 2015 के विचार और वापसी से संबंधित विधेयक भी इसी तरह बिना किसी चर्चा के पारित कर दिए गए। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने उपसभापति से कहा कि यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि विधेयक सर्वसम्मति से पारित किए गए, न कि शोरशराबे के बीच।

इस पर कुरियन ने मुस्कराते हुए कहा- शोरशराबा कैसे हो सकता है। पूरी तरह शांति है। हर कोई शांत है। ठंडी हवा बह रही है। मुझे नहीं पता कि यह हवा कहां से आ रही है। जब संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने और विधेयक लाने की बात कही, तो आजाद ने जवाबी हमला करते हुए कहा- हम सब सहमत हुए हैं और मैंने कहा कि हम विधेयकों को अगले तीन दिन में पारित करेंगे। हमारा कहना था कि हम अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विधेयक को पारित करेंगे और हमने अपना वायदा पूरा किया है।

आजाद ने कहा- हमने इतने कम समय में तीन विधेयकों को पारित कर अपनी क्षमता और सामर्थ्य का प्रदर्शन किया है। अपनी क्षमता के लिए हमें दंड नहीं मिलना चाहिए। इस पर नकवी ने खड़े होकर कहा कि मुझे थोड़ी और शक्ति दिखाइए। विपक्ष का तर्क था कि सर्वदलीय बैठक में फैसला हुआ था कि दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक विधेयक रखे जाएंगे और उसके बाद असहिष्णुता, बाढ़, महंगाई व अरुणाचल प्रदेश जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

कांग्रेस को माकपा के सीताराम येचुरी से समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि चर्चा हो सकती है और उन्हें विधेयक जल्द पारित करने के लिए सजा नहीं दी जानी चाहिए। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विधेयक इस बात की वकालत करता है कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को मानव या पशु का शव ले जाने या सिर पर मैला ढोने के लिए विवश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

विधेयक के तहत अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित किसी महिला पर यौन हमला या यौन शोषण अपराध है। इसमें कहा गया है कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित किसी महिला को उसकी मर्जी के बिना जानबूझकर छूना, असम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना, यौन प्रकृति के हाव-भाव प्रदर्शित करना, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित महिलाओं को किसी मंदिर के लिए देवदासी के रूप में समर्पित करना या इस तरह के अन्य कृत्य को भी अपराध माना जाएगा।

विधेयक का उद्देश्य अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने पर केंद्रित है और इस तरह के अपराधों में मुकदमे के लिए विशेष अदालतों के गठन और पीड़ितों के पुनर्वास की पैरवी करता है। इसके तहत जूते की माला पहनाना, जाति के नाम पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लोगों को गाली देना, उनके खिलाफ दुर्भावना को बढ़ावा देना, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करना या इसकी धमकी देना या किसी दिवंगत अजा-अजजा हस्ती का अपमान करना भी अपराध माना जाएगा।

इसमें कहा गया है कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित लोगों के प्रति गैर अनुसूचित जाति या गैर अनुसूचित जनजाति से संबंधित लोक सेवकों द्वारा दायित्व में लापरवाही बरतने का अपराध छह महीने से एक साल तक की कैद के रूप में दंडनीय होगा। विधेयक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचारण निवारण) अधिनियम में 1989 में संशोधन की बात कहता है। इसमें कार्रवाई की कुछ नई श्रेणियां भी हैं। इन श्रेणियों के तहत किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने या न डालने के लिए अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित किसी व्यक्ति को इस तरह विवश करना, जो कानून के खिलाफ हो, अपराध माना जाएगा। अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित किसी व्यक्ति की जमीन को गलत तरीके से हथियाना भी विधेयक के तहत अपराध है।

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