लाखों की मार्फिन के साथ अभियुक्त गिरफ्तार

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सुल्तानपुर (ब्यूरों) – लाखों की मार्फिन बरामदगी के मामले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। जिनके पास से 265 ग्राम खुला व 430 पुड़िया मारफीन बरामद किए गए है। जबकि 11300 रूपये नकदी भी बरामद हुए है। जिन्हें जेल भेजने की कार्यवाही की गई है।

आपको बता दें कि, मामला जगदीशपुर थानाक्षेत्र के पूरे पासी मजरे दक्खिन गांव का है। जहां की रहने वाली केशपता पत्नी स्व. दिनेश कुमार व राजकुमारी एवं मंजू देवी को पुलिस ने गुरूवार की सुबह उनके घर के पास से ही गिरफ्तार किया। जिनके पास से पुलिस 265 ग्राम मार्फिन पाउडर खुला व 430 पुड़िया मार्फिन बरामद दिखा रही है। उनके पास से 11300 रूपये भी बरामद बताया गया है। थानाध्यक्ष राजकुमार यादव के मुताबिक गुरुवार को बाजार शुकुल व जगदीशपुर थाने की संयुक्त टीम ने एक अभियान के मद्देनजर अपने क्षेत्र में छापेमारी की,जिसमे से दोनों थाना क्षेत्रों में हुई छापेमारी में सिर्फ एक ही गाँव के नशा कारोबारियों को पुलिस पकड़ने में सफल हो पाई।

ऐसे में यह माना जा रहा है कि क्या संयुक्त टीम का यह अभियान सिर्फ एक ही गाँव के लिए चलाया गया था या फिर दोनों थाना क्षेत्रों में इस गाँव को छोड़कर पूरे थाना क्षेत्र में कोई नशा कारोबारी रह ही नही गया है या फिर पुलिस के सूत्र कमजोर हो गए है जिससे उन्हें मात्र दो थाना क्षेत्रों में एक ही गाँव के नशा कारोबारियों को पकड़ने में सफलता मिली।फिलहाल पुलिस के मुताबिक इन महिलाओं के परिवार का कारोबार नशीले पदार्थ का धंधा ही करना है। जिन्हें अदालत के समक्ष पेश कर जेल भेजने की कार्यवाही की गई।

वही आपको बताते चले कि मार्फिन बरामदगी में मुज्लिम बनी केशपता ने जगदीशपुर पुलिस पर गलत ढंग से गिरफ्तारी का आरोप लगाते हुए करीब दो साल पूर्व अपने पति दिनेश कुमार को जेल भेजने का आरोप लगाया था,उसके आरोप के मुताबिक पुलिस की पिटाई से जेल में निरूद्ध होने के दौरान जेल अधिकारियों के जरिये जानबूझकर की गई लापरवाही के चलते समुचित इलाज न हो पाने से उसके पति की जान चली गई। इस मामले में स्व.दिनेश कुमार की पत्नी केशपता के जरिये जेल अधीक्षक व तत्कालीन जगदीशपुर थानाध्यक्ष समेत सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी गई थी, जिस पर करीब डेढ़ वर्ष पूर्व सीजेएम कोर्ट ने मुकदमा दर्ज कर जांच के लिए आदेश भी दिया है।

फिलहाल कोतवाली नगर की पुलिस डेढ़ वर्ष बाद भी कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं कर सकी है,नतीजतन जांच की बात तो दूर अभी तक आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर तक नही दर्ज हो सकी है।सीजेएम विजय कुमार आजाद की अदालत ने भी एफआईआर अब तक न दर्ज कर पाने के बावत कई बार नगर कोतवाल से रिपोर्ट मांगी,लेकिन महान पुलिस ने डेढ़ वर्ष बाद भी कोर्ट को रिपोर्ट तक भेजना मुनासिब नही समझा।फिलहाल केशपता की अर्जी पर हुए कोर्ट के आदेश से तो उसके पति की जान लेने के प्रकरण में एफआईआर तो नही दर्ज हो सकी लेकिन इसी बीच वह अपने गाँव की ही दो महिलाओं के साथ संयुक्त पुलिस टीम के मुताबिक एक अभियान के मद्देनजर हुई छापेमारी में मुल्जिम जरूर बन गई। ऐसे में मामले को संदेह के नजर से देखा जा रहा है।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा
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