द्वारिकाधीश के विवाहोत्सव मे नगर बना बाराती,भावविभोर हो झूम उठे श्रद्धालु भक्त

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द्वारिकाधीश के विवाहोत्सव मे नगर बना बाराती,भावविभोर हो झूम उठे श्रद्धालु भक्त

संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ 

 प्रतापगढ ।  श्रीमद् भागवत कथा जीवन को महान व नई दिशा देती है। इसीलिए भजन सत्संग कर भगवान श्रीविष्णु हरि और घनश्याम श्रीरामचंद्र प्रभु से भक्त को नाता जोड़ना चाहिए। भगवत स्मरण से भक्त प्रहलाद का न बल्कि जीवन सफल हुआ बल्कि उसने अपने हिरण्यकश्यप जैसे दैत्य का वध कर लोगों को जुल्म व अन्याय से मुक्ति दिलाने का काम किया है।यह विचार आयोध्या से आए संत गोपालानन्द महराज ने गुरूवार को गङवारा में आयोजित संगीतमयी श्रीमद् भगावत कथा को सुनाते हुए व्यक्त किए । कथा सुनने के लिए पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही । उन्होंने कहा कि नंदकिशोर श्रीकृष्ण रूक्मिणी का हरण कर रथ में बिठाकर चले जाते हैं। इसके बाद वह उनसे प्रेम विवाह कर लेते हैं। रूक्मिणी के इस कृत्य से उनके पिता व भाई काफी नाराज होते हैं। उन्होंने बताया कि मथुरा के राजा कंस के अत्याचार व पापों को खत्म करने के लिए श्रीकृष्ण कंस का वध कर देते हैं। राजा कंश वध के बाद यशोदानंदन श्रीकृष्ण कंस के कारागार से उनके पिता वासुदेव माता देवकी को रिहा कराते हैं तो बालमुकंद के इस तेज व चकमते स्वरूप को देखकर माता पिता की आंखें आसुओं के सैलाब से भर आती हैं। 
श्रीकृष्ण की बारात में नगर बना बराती : श्रीमद् भागवत कथा के दौरान गुरूवार की शाम श्रीकृष्ण.रूकमणि विवाह धूमधाम से कराने बरात ढोलनगाड़ों के साथ निकाली गई। गाजेबाजों के बीच जब निकली तो शहरवासी बाराती बनकर जमकर झूमे नाचे।

रिपोर्ट- राजाराम वैश्य प्रतापगढ

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