धूमधाम से मनी हजारी प्रसाद द्विवेदी की 38वीं पुंण्यतिथि

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बलिया(ब्यूरो)- भारतीय मनीषा के प्रतीक और साहित्य एवं संस्कृति के अप्रतिम व्याख्याकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की 38 वीं पुण्यतिथि शुक्रवार को उनके पैतृक गांव ओझवलिया में सादगी से मनाई गई, प्रबुद्धजनों ने आचार्य द्विवेदी के चित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।

इस मौके पर “हिंदी साहित्य जगत् में हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रासंगिकता” विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया जो देर शाम तक चलता रहा। आचार्य पं0 हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डा0 जनार्दन राय ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी के शीर्षस्थ साहित्यकारको में से एक है। वे उच्चकोटि के निबन्धकार, उपान्यासकार, आलोचक, चिंतक तथा शोधकर्ता थे उन्होंने सुर, तुलसी, कबीर आदि पर जो विद्वतापूर्ण आलोचनाएं लिखी वे हिंदी में पहले कभी नहीं लिखी गयी।

पंडित जी अपनी लेखनी के द्वारा ही संसार में अमर हो गये। वाणभट्ट की आत्मकथा,पुनर्नवा,चारू चन्द्रलेख,अनामदास का पोथा जैसे ऐतिहासिक उपान्यास के माध्यम से अपनी ऐतिहासिकता और पौराणिकता की रक्षा करते हुए वे अपने युग व समाज के सच को उजागर किये। इनके साहित्य व शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए 1957 में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

विशिष्ट अतिथि सांसद भरत सिंह के प्रतिनिधि अरुण सिंह गामा ने कहा कि स्वनामधन्य,विद्वतप्रवर डा0 द्विवेदी जी साहित्य जगत् के उन गिने-चुने नक्षत्रों में से एक है, जिनके गरिमामय व्यक्तित्व ने हिंदी साहित्य को गौरवान्वित तो किया ही,हिंदी के सर्वांगीण विकास में अद्वितीय योगदान भी किया जिनके परिणामस्वरूप हिंदी अपनी स्वतंत्र सत्ता और अलग पहचान बनाये रखने में सक्षम रही । कहा कि,सांसद भरत सिंह के प्रयास से बलिया रेलवे स्टेशन पर 8×8 का एक शिलापट्ट लगने जा रहा है जिस पर पंडित जी की समस्त कृतियों का उल्लेख रहेगा।

भाजपा के जिला महामंत्री सुरजीत सिंह परमार ने कहा कि श्री द्विवेदीजी के साथ एक युग जुड़ा हुआ है, जिसने इनके सुयोग्य एवं सक्षम मार्गदर्शन में अनेक उपलब्धियाँ अर्जित की। इस प्रकार साहित्य जगत् में एक नवीन युग का सूत्रपात करने में वे अग्रणी रहे। भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष अरूण सिंह बन्टू ने कहा कि आचार्य जी संस्कृतनिष्ट जीवन जीने के आदती थे उन्होंने गम्भीर अध्ययन, मनन एवं चिंतन द्वारा तपोनिष्ठ जीवन में हिंदी साहित्य की महनीय सेवा की साथ ही अपने कृतियों के माध्यम से हिंदी की गौरव-गरिमा को समुन्नत करने का अनवरत प्रयास किया है ।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य सत्यनारायण गुप्त ने कहा कि हिंदी साहित्य में उनका स्थान अभी भी उस देदीप्यमान सूर्य के समान है, जो तिरोहित तो हो गया है किन्तु उसका प्रकाश अभी भी हिंदी जगत् को आलोकित कर रहा है। ग्राम प्रधान विनोद दुबे ने कहा कि सांसद भरत सिंह को द्विवेदी जी के स्मृतियों को संजोने एवं जीवंत करने के लिए गाँव में, स्मृति प्रवेश द्वार,सामुदायिक भवन, हजारी सरोवर की सौन्दर्यीकरण कराने, 63 केवीए का अतिरिक्त ट्रांसफार्मर व डमरछपरा में 25 की क्षमतावृद्धि कर 63 केवीए का ट्रांसफार्मर स्वीकृति कराने के लिए बधाई देते हुए आभार व्यक्त करता हूँ ।

इस अवसर पर संचालन कर रहे आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति के प्रबंधक सुशील कुमार द्विवेदी ने मुख्य वक्ता, वरिष्ठ साहित्यकार डा0 जनार्दन राय को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया । इस मौके पर श्रीचन्द्र पाठक, रमेशचंद्र पाठक, रामदर्शन वर्मा, राजेंद्र वर्मा, सत्यनारायण रौनियार, विनोद गुप्ता, वृजकिशोर दुबे, सोनू दुबे, शम्भू, दिनेश आदि मौजूद रहे ।

रिपोर्ट- संतोष कुमार शर्मा

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