आज ही के दिन पहली बार नींव रखी गयी थी भारत के …

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15 अगस्त 1947 या फिर 26 जनवरी भले ही भारत के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण तारीखों के रूप में दर्ज हैं लेकिन भारत के इतिहास पटल पर तीन जून भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं हैं I

तीन जून को विभाजन का प्रस्ताव रखते हुए लार्ड माउन्टबेटेन, साथ में हैं कांग्रेस के जवाहर लाल, सरदार पटेल आदि और मुश्लिम लीग से जिन्ना
तीन जून को विभाजन का प्रस्ताव रखते हुए लार्ड माउन्टबेटेन, साथ में हैं कांग्रेस के जवाहर लाल, सरदार पटेल आदि और मुश्लिम लीग से जिन्ना

3 जून यानि की आज के ही दिन भारत के अंतिम वाइसराय गर्वर्नर जनरल लार्ड लुईस माउन्ट बेटेन ने भारत की दोनों पार्टियों कांग्रेस और मुश्लिम लीग के सामने भारत के विभाजन का प्रस्ताव रखा था I लार्ड लुईस माउन्ट बेटेन के द्वारा प्रस्तुत इसी खाके को भारत के इतिहास में “थर्ड जून प्लान” या फिर “माउन्ट बेटेन योजना” के नाम से जाना जाता हैं, और बाद में इसी खाके को ब्रिटेन की संसद ने सर्व सम्मति से पास किया था और इसको नाम दिया गया था “भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947″ I

मुश्लिम लीग और कांग्रेस के नेताओं के आपसी मतभेदों के कारण वर्ष 1947 आने तक एक बात पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी थी की भारत का  विभाजन के बगैर आज़ादी संभव नहीं हैं, क्योकि मोहम्मद अली जिन्ना और उसकी मुश्लिम लीग किसी भी कीमत पर अपनी पकिस्तान की जिद को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे और ब्रिटिश सरकार को भारत की सत्ता को चला पाने में बहुत सी आंतरिक कठिनाइयों का सामना करना पड रहा था और साथ ही साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर भी ब्रिटिश सरकार को आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा था I और भारत में दिन प्रति दिन मजहबी दंगे और अधिक बढ़ते ही जा रहे थे, और ब्रिटिश सरकार को भारत से जिस आमदनी की आशा थी वह भी अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थी अतः अब ब्रिटिश सरकार ने इन सभी समस्याओं से फुर्सत पाना ही उचित समझा I और अंत में ब्रिटिश सरकार ने यह घोषणा की कि जून 1948 तक ब्रिटिश सरकार अपना यूनियन जैक दिल्ली के लालकिले से उतार लेगी I

राउंड टेबल मीटिंग के दौरान माउन्टबेटेन के साथ हैं जवाहर लाल, सरदार पटेल, जिन्ना और अन्य
राउंड टेबल मीटिंग के दौरान माउन्टबेटेन के साथ हैं जवाहर लाल, सरदार पटेल, जिन्ना और अन्य

और तभी ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन के सिंघासन के विश्वास पात्र व नजदीकियों में से एक लार्ड लुईस माउन्टबेटेन को भारत का गवर्नर जनरल बना कर भेजा I माउन्टबेटेन ने आते ही इस बात की घोषणा की, कि जून 1948 तक भारत को आज़ाद कर दिया जाएगा, और भारत के विभाजन का प्रस्ताव रखा, जिसे कांग्रेस के बड़े नेता जैसे महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, जवाहर लाल नेहरु आदि नेताओं ने अस्वीकार कर दिया लेकिन अंत में जिन्ना की जिद के आगे उन्हें यह प्रस्ताव स्वीकार करना ही पड़ा I

भारत विभाजन का प्रतीकात्मक चित्र
भारत विभाजन का प्रतीकात्मक चित्र

माउन्टबेटेन योजना में किये कुछ प्रस्ताव –

१) बंगाल और पंजाब राज्यों का विभाजन होगा जिनका आधा भाग पकिस्तान के साथ और आधा भाग भारत के साथ रहेगा

२) लोगों को यह अधिकार दिया गया कि वह अपना भविष्य स्वयं सुनिश्चित करें कि उन्हें पकिस्तान में रहना हैं या फिर भारत में

३) बलूचिस्तान को अधिकार दिया गया कि वह स्वयं अपने भविष्य का निर्णय ले की उसे किसके साथ विलय करना हैं

४) देश की सभी 562 देशी रियासतों को अपना भविष्य स्वयं चुनने का अधिकार दिया गया

५) दोनों देशों की आबादी और भूमि के आधार पर सेना का भी बटवारा कर दिया जाएगा

६) रेड क्लिफ मिशन को अधिकार होगा दोनों देशों के बीच की सीमाओं के निर्धारण का आदि आदि !!

 

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