रज्जो देवी कबीर आश्रम पर चार दिवसीय ध्यान शिविर के आयोजन

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मैनपुरी। रज्जो देवी कबीर आश्रम पर चल रहे छठवाँ चार दिवसीय ध्यान शिविर के तीसरे दिन एक सैकड़ा से अधिक सन्त भक्तो ने भाग लिया।
इस अबसर पर ध्यान प्रशिक्षक महन्त श्री अमर साहेब जी ने बताया क़ि हमारे पास तीन साधन हैं तन मन वचन ।इन तीनो की शुद्धता की पवित्रता के लिए सन्त गुरु दस दोषी करन छोड़ने जी बात कहते है जब तक इनके दोष जैसे तन के तीन दोष चोरी हिंसा व्यवचार नही छूटेंगे तब तक तन पवित्र नही होगा।एवं छल ईर्ष्या मान कपट ये चार दोष छोड़ देने से मन निर्मल मन पवित्र होगा तथा गाली निंदा झूठ छोड़ देने से वचन पवित्र होता है ।इस प्रकार तन मन वचन कि पवित्रता से ही भजन ध्यान साधना में उतरा जा सकता है ।इसी प्रकार अकाम धारण करने से काम चला जाता है अक्रोध धारण करने से क्रोध चला जाता है निर्लोभित धारण करने से लोभ चला जाता है एवं निर्मोहित धारण करने से मोह चला जाता है तथा निरहंकारिता धारण करने से अहंकार चला जाता है ।
अब साधना की शुरूआत हो जाती जब हमारे मन का अहंकार गल जाता तो वही तन जो अकड़ कर चलता था उससे दीन दुखियो की सेवा शुरू हो गई ।तन सेवा से ही पवित्र हो सकता हैं जब तन में सेवा भाव आयेगा तो मन के अन्दर त्याग भाव जाग्रत होगा त्याग भेष भूषा से नही सेवा से आता मन में जब त्याग भाव जग जाता तो ह्रदय में प्रेम प्रस्फुटित हो जाता प्रेम रटने से नही होता जिसे दुनिया वाले कहते वह या तो शारीरिक मोह हो या आसक्ती होगी राग होगा जो सारे पापो की जड़ अज्ञान की खानि होगी।प्रेम मीरा शबरी स्वामी विवेकानन्द सद्गुरु कबीर साहेब के अन्दर था जो स्वार्थ वासना से ऊपर उठकर मानवता के प्रति धर्म के प्रति गरीबो के प्रति जीवन भर अलख जगाते रहे।जागो लोगो मत सो ना कर नींद से प्यार जैसा सपना रैन का वैसा यह संसार ।
महन्त जी बताते हैं की भजन के विन ध्यान, साधना के बिना परमार्थ, मानवता के बिना हमारी जिंदगी, रात्रि के सपने के समान हैं।जो सुबह को सपना टूटता हैं तो हाथ खाली पश्चाताप रहता हैं अतःभजन ध्यान साधना द्वारा अपना मानव जीवन सार्थक बनाये।
रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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