विश्व के 100 प्रमुख विचरकों में से 4 भारतीय मूल के |

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भारत ने एक बार फिर साबित किया है कि उसे विश्व गुरु की उपाधि ऐसे नहीं मिली बल्कि वास्तव में उसके पास ऐसी प्रतिभाएं हैं जो उसे विश्वगुरु की उपाधि से गौरवान्वित करती हैं | हाल ही में प्रतिष्ठित ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका ने दुनिया के 100 प्रमुख विचारकों की सूची में चार भारतीय मूल के लोगों के भी नाम शामिल किए हैं, जिन्होंने मानवता की बेहतरी के लिए नए विचार देने का काम किया।

इनमें न्यूयार्क में रहने वाली इपीबोन की सहसंस्थापक नीना टंडन, गूगल के महाप्रबंधक राजन आनंदन, सिविक एक्सीलेटर नाम की निवेश कंपनी के संस्थापक आयशा खन्ना और जैनब गाडियाली के नाम शामिल हैं |

maxresdefaultनीना टंडन ने विश्व स्वास्थ्य, मानवाधिकार, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में प्रगति के लिए नए आविष्कार किए। उन्होंने टूटी हड्डियों के इलाज के लिए नई हड्डियां उगाने का तरीका खोजा। इससे पहले डॉक्टर मरीज के शरीर के किसी अन्य हिस्से की हड्डियों का इस्तेमाल टूटी हड्डियों को जोडऩे के लिए करते थे, लेकिन टंडन ने एक अलग तरीका खोज निकाला। उन्होंने मरीज के स्टेम सेल से नई हड्डियां उगाने का तरीका ढ़ूंढा।

BL10_IT__RAJAN_ANA_1264159fगूगल के महाप्रबंधक राजन आनंदन (दक्षिण एशिया और भारत) ने भारत में इंटरनेट और मोबाइल को आम आदमी के पहुंच में लाने के लिए गूगल जैसी बड़ी कंपनी के प्रभाव का बखूबी इस्तेमाल किया। उन्होंने भारतीय मोबाइल फोन निमार्ताओं को इस बात के लिए राजी किया कि वे सस्ते फोन बनाएं। उन्होंने मोबाइल सेवा प्रदाताओं को राजी किया कि वे डेटा प्लान की कीमतों में कटौती करें। इसके साथ ही उन्होंने गूगल ट्रांसेलशन को कई सारी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई।

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प्राइसवाटरकूपर की आयशा खन्ना ने शैनॉन सीलर के साथ मिलकर कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत महिलाओं को स्टार्ट अप के लिए पूंजी मुहैया करायी । उन्होंने अमेरिका में 13 नए स्टार्ट अप को पूंजी मुहैया करायी, जिनके संस्थापकों में कम से कम एक महिला जरूर है और इनमें से 11 स्टार्ट अप की शुरुआत महिलाओं ने की है।

1082120992जैनब गाडियाली ने फेसबुक के लिए काम करते हुए दुनिया भर की महिला प्रोग्रामरों के योगदान को दुनिया के सामने रखा।

उन्होंने कैलिफोर्निया में अपने सहयोगी एरिन समर्स के साथ मिलकर महिला प्रोग्रामरों को बढ़ावा देने के लिए ‘वोग्रामर’ नाम का अभियान चलाया। इस अभियान के पहले ही साल में फेसबुक के इन दोनों इंजीनियरों ने मिलकर 50 महिला प्रोग्रामरों को दुनिया भर में उनकी पहचान दिलाई।

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