दाल के दामों से देश को बड़ी राहत, होलसेल बाजार में 40 फीसदी तक कम हुए दाम…

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लम्बे अरसे से दाल एक गरीब भारतीय से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक के सर का दर्द बनी हुई है, और संसद से लेकर सड़क तक दाल पर बवाल मचा हुआ है, पर अब यह समस्या टलती दिखाई दे रही है क्योकि दाल के आसमान छू रहे दाम अब नीचे आ रहे हैं और इन दामों में करीब 40 फीसदी की कमी है, जानकारों की माने तो आने वाले दिनों में इन दामों में और कमी आएगी |

अब सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि दाल के दाम जमीन पर आ गए, तो आपको बता दें कि दालों के दाम के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह थी जमाखोरी चूँकि इस बार बारिश अच्छी हुई है और दाल की अच्छी फसल आने की उम्मीद है, अगले दो महीनों बाद से बाजार में नई दाल आने लगेगी इसलिए अब व्यापारियों को अपने स्टॉक की चिंता हो रही और उन्होंने तेजी से स्टॉक निकालना शुरू कर दिया है |

दाल के दाम कम होने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि केंद्र सरकार ने बड़ी मात्र में दाल इम्पोर्ट की है और उसके मार्किट में आने के बाद व्यापारियों के अपना स्टॉक निकल पाना और मुश्किल हो जायेगा, इसलिए अब दालों की कीमत में इतनी गिरावट देखने को मिल रही है |

अरहर दाल जो पंद्रह दिन पहले 105 से 120 रुपये थी और उसे लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए “अरहर मोदी” का नारा दिया था, अब 70 से 80 रुपये पर आ गई है. मूंग दाल जो पंद्रह दिन पहले 80 से 90 रुपये और अब 60 से 70 रुपये तक नीचे आ गई है, उड़द दाल के दाम पंद्रह दिन पहले 135 रुपये और अब 110 रुपये तक जा पहुंची है. चना दाल के दाम पंद्रह दिन पहले 120 रुपये थे और अब 75 रुपये तक नीचे आ गए हैं |

इन सब के बीच ख़तरा एक बार फिर देश के किसानों पर आ गया है जिन्होंने दल के अच्छे दाम मिल्न की उम्मीद से इस बार बड़ी मात्र में दाल की बुआई की है और अब जबकि उंकी फसल बाज़ार में आने का समय आ रह है तो एक बार फिर दालों के दाम तेजी से गिर रहे हैं और फिर व्यापारी मोटा मुनाफा कमाने के लिए पहले तो गिरे हुए दामों में किसानों से दाल खरीदेंगे और बाद में जमाखोरी कर यही दाल देश के आम लोगों और उसी किसान को बढे हुए दामों में बेचेंगे, जमाखोरी की इस समस्या से निपटने के लिए सराकर को कुछ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है |

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