भारत के ऊपर हुए अब तक के 5 बड़े आतंकी हमले

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मुंबई सीरियल ब्लास्ट – (257 लोग मारे गए, 700 से अधिक घायल) –

तक़रीबन आज से 22 वर्ष पहले देश की मायानगरी कही जाने वाली मुंबई में एक के बाद एक सिलसिलेवार तरीके से 12 बम धमाके हुए थे I यह सभी बम धमाके एक के बाद एक अलग-अलग जगहों पर हुए और इनमें तक़रीबन 257 लोग मारे गए तथा 700 से ज्यादा लोग इस पूरे हमले में घायल हो गए थे I

serial_blast_in_mumbai1993 में हुए बम धमाकों में शामिल मुख्यआरोपियों में से एक मात्र याकूब मेमन को बीते 30 जुलाई को नागपुर की जेल में फांसी दे दी गयी I तक़रीबन 22 साल बाद हुई इस पहली फाँसी में भी सत्ता के गलियारों से लेकर मिडिया हाउस तक, बॉलीवुड से लेकर अंडरवर्ल्ड तक के जाने-माने, नाम वाले और बदनाम वाले हर तरह के लोगों ने अपने अपने तरीके से विरोध भी जताया I इतना ही नहीं बल्कि इस आतंकवादी और न्रशंस हत्या को अंजाम देने वालों में से एक को बचाने के लिए सभी ने अपनी एडी और चोटी का जोड़ भी लगा दिया फलतः पहली बार स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश के सर्वोच्च न्यायालय के कपाट एक आतंकवादी के साथ कहीं नाइंसाफी न हो जाय उसके लिए सुबह के 3 बजे एक बार फिर से खोले गए I और अंत में फाँसी दे ही दी गयी I इस फाँसी से हम यह तो नहीं कह सकते कि उन 257 लोगों की आत्मा को शांति मिली होगी लेकिन हाँ इतना जरूर कहते है कि इससे उनके परिवार वालों को संतोष जरूर मिलेगा I

देश पर हुए अब तक के सभी आतंकी हमलो में इसे सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है I इस हमले को अंजाम देने में सबसे मुख्यसहायक भूमिका पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजिंसी ISI का था ऐसा कहा जाता है I भारत में इस पूरे प्रकरण को अंजाम देने वालों में तथाकथित अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम, याकूब मेमन (फाँसी हो चुकी है) और इसका भाई टाइगर मेमन है I दाउद और याकूब ने पाकिस्तान में शरण ले रखी है I

देश के ऊपर हुए इस आतंकी हमले में प्रसिद्द बॉलीवुड अभिनेता व कांग्रेस के पूर्व मंत्री स्वर्गीय सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त समेत कुल 189 लोगों के खिलाफ तक़रीबन 10,000 पन्नों से भी अधिक की चार्जशीट अदालत को सौंपी गयी थी I

यह अब तक देश पर हुए आतंकी हमलों में सबसे बड़ा आतंकी हमला है I

 

मुंबई ट्रेन धमाका (तक़रीबन 188 लोगों की मौत और 800 से ज्यादा घायल)

11 जुलाई 2006 को मुंबई की लाइफ लाइन (जीवन रेखा) कही जाने वाली रेलवे लाइन पर एक के बाद एक हुए 7 धामकों ने एक बार फिर वर्ष 1993 के बाद पूरी मुंबई को झकझोर कर रख दिया था I एक बार फिर से देश की मायानगरी पर आतंकियों को उनके मकसद में सफलता हासिल हुई थी और देश की सरकार, खुफियां एजिंसियों और पुलिस को इस पूरे प्रकरण की भनक तक भी नहीं लग पायी थी I यह किस की लापरवाही का नतीजा था और यह क्यों हुआ यह सब तो आज भी बस एक राज़ ही है लेकिन इसका भयानक परिणाम मुंबई की निर्दोष जनता को भुगतना पड़ा I और इसके अंजाम के तहत 188 निर्दोष नागरिकों ने अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकाई तो बाकी के 800 से ज्यादा घायलों में से किसी ने हाथ तो किसी ने पैर तो किसी ने अपनी याददास्त ही खो दी I

mumbai train blast

इस पूरे प्रकरण में भारत सरकार की तरफ से यह कहा गया और साबित भी किया गया कि इसमें पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजिंसी ISI का ही हाथ है I ISI ने इसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोएबा की मदद की और इस पूरे प्रकरण को अंजाम दिया I

आतंकवादियों ने पूरे प्रकरण को मुंबई की जीवन रेखा (लाईफ़ लाइन) कही जाने वाली मुंबई लोकल के 7 स्टेशनों पर किया था और मात्र तक़रीबन 10 मिनट के भीतर ही उन्होंने पूरी मुंबई सहित पूरे के पूरे भारत को एक बार फिर से हिला कर रख दिया था I इन धमाकों का विस्फोटक आरडीएक्स, अमोनियम नाइट्रेट, फ्यूल ऑयल और कीलों से बनाया गया था, जिसे सात प्रेशर कुकर में रखकर टाइमर के जरिए उड़ाया गया था।

यह धमाके खार, बांद्रा, जोगेश्वरी, माहिम, बोरीवली, माटुंगा और मीरा-भायंदर रेलवे स्टेशनों के पास हुए थे। इन धमाकों का समय था तक़रीबन 11 जुलाई 2006 को शाम 6 बजकर 24 मिनट से लेकर 6 बजकर 35 मिनट के बीच का I धमाके में कुल 90 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था। इन धमाकों को अंजाम देने के लिए आतंकियों को पाकिस्तान में बम बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। इस मामले में 11 हजार पृष्ठों का आरोपपत्र मकोका न्यायालय में दर्ज किया गया है और मामले की रोजाना सुनवाई दिसंबर 2007 में शुरू हुई, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 2010 में सुनवाई बंद कर दी गई।

26/11 मुबई पर आतंकी हमला (तक़रीबन 166 की मौत और तकरीबन 293 से अधिक घायल)

वर्ष 1993 के सीरियल ब्लास्ट, वर्ष 2006 के मुंबई की लाइफ लाइन मुंबई लोकल में हुए 7 सीरियल ब्लास्ट के बाद एक बार फिर से 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर एक बार फिर से आंतकियों का कहर टूट पड़ा था I भारत में आज भी कुछ भी नहीं बदला था सरकार भी वही थी और ख़ुफ़िया एजिंसियाँ भी वही और नाकामी भी वही I बस अगर कुछ बदला तो वह था बाद में एक सिपाही ने अपनी जान देकर शहादत को गले लगाते हुए एक आतंकी को जिंदा पकड़ कर भारत के हवाले कर दिया था I जिसका नाम था अजमल कसाब और जिसे बाद में काफी खातिरदारी के बाद फाँसी दी गयी I

mumbaiAttack2008_2258195bमुंबई पर हुए इस आतंकी हमले पर अगर एक नजर डालें तो इस हमले को भी अंजाम दिया था पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोएबा ने I लश्कर के 10 आतंकी पाकिस्तान के करांची बंदरगाह से समुद्र के रास्ते से भारत में प्रवेश करते है और फिर भारत के शहर मुंबई में आतंक का नंगा नाच करते है I इस पूरे प्रकरण को अंजाम देने में एक फिर से पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजिंसी ISI ने इन आतंकियों का समर्थन किया था और पूरा सहयोग भी दिया था I

इन आतंकियों ने एक ही साथ मुबई में प्रवेश करने के बाद मुबई के 6 मुख्य-मुख्य स्थानों को निशाना बनाया I जिनमें ताज होटल, नरीमन हाउस, मुंबई सेन्ट्रल रेलवे स्टेशन, होटल ओबराय ट्राईडेंट, लियोपोल्ड कैफे और कामा हॉस्पिटल है I

इस पूरे मामले में आतंकियों को सभी दिशा निर्देश सेटेलाईट फोन के जरिये पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं के द्वारा दिए जा रहे थे I जिसके पुख्ता सबूत भारत ने पाकिस्तान को सौंपे है I इस मामले का मुख्यआरोपी जकीउर्रहमान लखवी है जिसे पाकिस्तान की अदालतों ने यह कहते हुए छोड़ दिया कि भारत ने उस ब्यक्ति के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं सौंपे है I

इन आतंकियों का जवाब देने के लिए मुंबई पुलिस की ATS टीम ने अच्छी खासी भूमिका निभायी थी, लेकिन स्थित की गंभीरता को देखते हुए भारत के गृहमंत्री ने तुरंत ही सेना की तीन टुकड़ियों को मौके पर रवाना कर दिया था I और बाद में इस पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ने सँभालते हुए सभी आतंकियों को मार गिराया था I हालाँकि NSG को इस पूरे मामले में दो बहादुर जवानों की छति का भी सामना करना पड़ा था जिनमें से एक थे मेजर संदीप उन्निक्रष्णन और एक हवलदार गजेन्द्र सिंह I

असम में धमाके (30 अक्टूबर 2008) (तक़रीबन 81 की मौत और 470 से अधिक घायल)

30 अक्टूबर 2008 दिन गुरूवार का और देश के सबसे अधिक खूबसूरत इलाकों में से एक असम की शांतिपूर्ण जमीन पर 13 अलग-अलग स्थानों पर सिलसिलेवार तरीके से बम धमाके किये गए जिनमें तक़रीबन 81 लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ गया था और तक़रीबन 470 से अधिक लोग इस पूरे आतंकी हमले में घायल हो गए थे I

India's Home Minister Shivraj Patil (wearing glasses) and officials visit one of the bomb blast sites in Assam, in Kokrajhar, about 200 Km (124 miles) from Guwahati, October 31, 2008.  REUTERS/Stringer

यह सभी बम विस्फोट बृहस्पतिवार सुबह ११:३० से ११:४० बजे के बीच हुए। कोकराझाड़ में तीन जगहों पर, गुवाहाटी में पांच जगहों पर और बोंगाईगांव में तीन व बरपेटा में दो जगहों में धमाके हुए।

दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट 29 अक्तूबर 2005 (तक़रीबन 63 लोगों की मौत और 210 से अधिक लोग घायल)

delhi-bomb-blast-2005

देश की राजधानी दिल्ली में दिवाली के त्यौहार के चलते हर तरफ बाजारों में काफी ज्यादा हलचल थी और इसी के चलते आतंकवादियों ने भी बाजारों की तरफ ही रुख किया था I आतंकवादियों ने दीवाली से 2 दिन पहले 3 बम धमाके किए। यह बम 2 धमाके सरोजनी नगर और पहाड़गंज जैसे मुख्य बाजारों में हुए। तीसरा धमाका गोविंदपुरी में एक बस में हुआ। इसमें कुल 63 लोग मारे गए जबकि 210 लोग घायल हुए थे।

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