जिले में धूम-धाम से मनाया गया राहुल संस्क्रतायन की 125वीं जयंती

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सुल्तानपुर (ब्यूरो)- आज महापंडित राहुल सांकृत्यायन का जन्म दिन है, साथ ही 125 वीं जयंती की शुरुआत भी। राहुलजी परम मेधावी, पांडित्य से पूर्ण,यायावर प्रतिभा थे। उनका घुमक्कड़ शास्त्र आज भी प्रेरक है, यायावरी से ही उन्होंने अनुसंधान, ज्ञान संचय और सार्थक लेखन किया। तिब्बत से वे हजारों ग्रंथों, पांडुलिपियों के साथ धर्म कीर्ति का ‘ प्रमाणवार्तिक’ खच्चरों पर लादकर पटना तक लाए। 20 वीं सदी के लाखों युवा, हजारों कवि, लेखकों ने उनकी पुस्तक ” भागो नहीं दुनिया को बदलो ” से प्रेरणा ली।’ मध्य एशिया का इतिहास’, ‘ वोल्गा से गंगा ‘ मेरी जीवन यात्रा ‘ उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं। मेरी जीवन दृष्टि के विकास में, इतिहास अनुसंधान, भारतीय समाज के विश्लेषण, और संस्कृति विमर्श की समझ को व्यापक करने मे राहुल सांकृत्यायन जी का बड़ा योगदान रहा है।

कहा जाता है कि तिब्बत के बौद्ध मन्दिर से (जहाँ वह बौद्ध लामा बनकर रह रहे थे) हजारों पुस्तकें खच्चरों पर लाद कर रातों रात तिब्बत से लेकर चुप चाप चले थे और भारत की सीमा में आकर दम लिया । सभी पुस्तकें अभी पटना संग्रहालय में हैं ।

उनमें से काफी पुस्तकों का अनुवाद राहुल जी ने हिंदी में किया । बहुतों की समीक्षा भी उन्होंने की है। उनकी लिखी सैकड़ो पुस्तकें भारतीय साहित्य की अनमोल निधि है। यायावर पत्रकार महापण्डित राहुल सांस्कृत्यायन को उनकी जयंती पर जगह जगह याद किया जा रहा है।कादीपुर में युवा साहित्यकार ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह के संयोजकत्व में उनको याद किया गया।
रिपोर्ट- संतोष यादव

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