यह हैं भारत की छह ऐसे स्पेशल फ़ोर्स जिनका नाम ही दुश्मन के लिए काफी हैं

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नेशनल सिक्युरिटी गार्ड –

इसकी स्थापना 80 के दशक पर तब की गयी थी जब पूरी दुनिया में आतंकवाद अपना सर उठा रहा था और भारत ले बगल में भारत का सबसे बड़ा विरोधी पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर आतंकवादियों को पनाह दे रहा था, उस समय देश के नेताओं को लगा कि इन विपरीत परिस्थितिओं से निपटने के लिए एक सशक्त फ़ोर्स का होना बहुत आवश्यक हैं तभी नेशनल सिक्युरिटी गार्ड (NSG) का गठन किया गया I

नेशनल सिक्युरिटी गार्ड के जवान
नेशनल सिक्युरिटी गार्ड के जवान

 

स्पेशल फ्रंटियर फ़ोर्स-

1962 में भारत चीन युद्ध के बाद एक नई सेना का गठन किया जाने का निश्चिय किया जो अपने आप इस सेना में शामिल होना चाहते थे, इस सेना में वह लोग थे जो परमपूजनीय दलाई लामा के मकसद और तिब्बत की आज़ादी से प्रेरित थे I

यह सिपाही काफी कुशल और पहाड़ो की लड़ाई में बहुत ही निपुण होते हैं I 26 अक्टूबर 1962 ब्रिगेडियर एस.एस. उबान ने और लेफ्टिनेंट कर्नल जी.एस. मेहता ने डिप्टी कमांडर की हैसियत से कैलाना मैदान में 600 स्वतंत्रता सैनिकों के साथ स्टैब्लिश मेंट 2-2 का गठन किया यह एक चुनौती पूर्ण काम था, क्योंकि इसमें भर्ती होने वाले सभी जवान विदेशी मूल के थे और राजनैतिक कारणों से भी यह एक गोपनीय कार्य था I

13 नवम्बर 1962 जो शुरू हुआ था सैनिकों की भर्ती और ट्रेनिंग का कार्यक्रम I स्पेशल फ्रंटियर फोर्स 14 नवम्बर 1962 को बनाया गया भारत का एक विशेष अर्द्धसैनिक बल हैं। इसका मुख्य लक्ष्य था मूल रूप से चीन के साथ अगले संघर्ष की पूर्व तैयारी। इस बल को छापामार युद्ध और खुफिया सूचनाएं जुटाने के लिए प्रशिक्षित किया गया था।

स्पेशल फ्रंटियर फ़ोर्स
स्पेशल फ्रंटियर फ़ोर्स

गरुण कमांडो फ़ोर्स-

इंडियन एयर फोर्स ने 2004 में अपने एयर बेस की सुरक्षा के लिए इस फोर्स की स्थापना की थी. मगर गरुण को युद्ध के दौरान शत्रु की सीमा के पीछे काम करने के लिए ट्रेन किया गया है. आर्मी फोर्सेस के इतर ये काली टोपी पहनते हैं. इसके निर्माण से लेकर अब तक इन्होंने कोई भारी लड़ाई नहीं लड़ी है और इन्हें मुख्य तौर पर माओइस्ट विरोधी मुहिम में शामिल किया जाता है.

भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो
भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो

पैरा कमांडो –

आसमान में 5 हजार से लेकर 30 हजार फीट तक की ऊंचाई से छलांग लगाकर दुश्मन का खात्मा करने वाले पैरा कमांडो की ट्रेनिंग काफी कड़ी होती है। आसमान से छलांग लगाने से पहले जमीन पर कड़ी ट्रेनिंग होती है। ये ट्रेनिंग 15 दिन की होती है। अलग अलग चरणों में ये ट्रेनिंग काफी खतरनाक होती है जो एक पैरा कमांडो को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।

एक पैरा कमांडो के पास दो पैराशूट होते हैं। पहला पैराशूट जिसका वजन 15 किलोग्राम होता है जबकि दूसरा रिजर्व पैराशूट जिसका वजन 5 किलोग्राम होता है। पैराशूट की कीमत 1 लाख से लेकर 2 लाख तक होती है। पैरा कमांडो को कई तरह की कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना होता है। इस ट्रेनिंग में अगर किसी ऊँची बिल्डिंग के अन्दर आतंकी छुपे हों तो कैसे उन्हें खत्म करना है।

जितनी ज्यादा ऊंचाई से छलांग लगाई जाएगी उतनी ही दूर तक दुश्मन के इलाके को कवर किया जा सकता है। पैराशूट और हथियार का वजन मिलाकर एक कमांडो अपने साथ 40 से 50 पचास किलोग्राम वजन ले जाता है। जब पैरा कमांडो को किसी स्पेशल ऑपरेशन को अंजाम देने का हुक्म मिलता है तो उसके लिए काफी तैयारी की जाती है। सबसे पहले खुफिया सूचना के आधार पर ऑपरेशन प्लान तैयार किया जाता है। कहां पैरा कमांडो को गिरना है और किस इलाके में दुश्मन पर धावा बोलना है

 

पैरा कमांडो
पैरा कमांडो

मार्कोस

भारत के मार्कोस (मरीन) कमांडो सबसे ट्रेंड और मार्डन माने जाते हैं। मार्कोस को दुनिया के बेहतरीन यूएस नेवी सील्स की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। मार्कोस कमांडो बनाना आसान नहीं है। इसके लिए सेलेक्‍ट होने वाले कमांडोज को कड़ी परीक्षा से गुजरना होता है। 20 साल उम्र वाले प्रति 10 हजार युवा सैनिकों में एक का सिलेक्शन मार्कोस फोर्स के लिए होता है। इसके बाद इन्हें अमेरिकी और ब्रिटिश सील्स के साथ ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग करनी होती है। देश के मरीन कमांडो जमीन, समुद्र और हवा में लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम होते हैं।

अमेरिकी नेवी सील्स के साथ ट्रेनिंग
अमेरिकी सील्स कमांडो फोर्स और इंडियन मार्कोस फोर्स का आपस में गहरा रिश्ता है। दोनों देशों के बीच आपसी ट्रेनिंग का करार है। मार्कोस फोर्स का गठन नेवी सील्स की तर्ज पर किया गया है। अमेरिकी सील्स का नाम सी. एयर एंड लैंड से बना है। यानी इसके ट्रेंड कमांडो तीनों स्थानों पर किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम होते हैं। 2011 में पाकिस्तान के एटबाबाद में दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन खात्मा यूएस नेवी सील्स के कमांडोज ने ही किया था।

हाथ-पैर बंधे होने पर भी तैर सकते हैं मार्कोस

मार्कोस इंडियन नेवी के स्पेशल मरीन कमांडोज हैं। स्‍पेशल ऑपरेशन के लिए इंडियन नेवी के इन कमांडोज को बुलाया जाता है। ये कमांडो हमेशा सार्वजनिक होने से बचते हैं। मार्कोस हाथ पैर बंधे होने पर भी तैरने में माहिर होते हैं। नौसेना के सीनियर अफसर की मानें तो परिवार वालों को भी उनके कमांडो होने का पता नहीं होता है। मार्कोस का मकसद आतंकियों को उन्हीं के तरीके से मारना, जवाबी कार्रवाई, मुश्किल हालात में युद्ध करना, लोगों को बंधकों से मुक्त कराना जैसे खास ऑपरेशनों को पूरा करना है। मुबंई हमले में मार्कोस ने भी आतंकियों को काबू किया था।

भारतीय नेवी के मार्कोस
भारतीय नेवी के मार्कोस

 

एस. पी. जी . कमांडो –

भारत वर्ष में एस.पी.जी. को वी.वी.आई.पी. लोगों को सुरक्षा देने के लिए जाना जाता हैं, यह स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के जवान होते हैं और इन्हें भारत की अलग-अलग पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेज से लिया जाता हैं, इनमें से ज्यादातर जवान और नए अफसर होते हैं I इनके पास अत्याधुनिक हथियार और अत्याधुनिक श्रेणी की संचार ब्यवस्था होती हैं I जिसके कारण यह किसी भी वी.वी.आई.पी. को पूर्ण रूप से सुरक्षा दे सकने में सक्षम होते हैं I

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एस.पी.जी.)
स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एस.पी.जी.)

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