6 हजार साल पुराना है रक्षाबंधन का इतिहास

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रक्षाबंधन भाई -बहन के प्यार का त्यौहार है ,एक मामूली सा धागा जब भाई की कलाई पर बंधता है ,तो भाई भी अपनी बहन की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने को तैयार हो जाता है .क्या आप जानते हैं कि रक्षाबंधन का इतिहास काफी पुराना है ,जो सिन्धु घाटी की सभ्यता से जुड़ा हुआ है.

असल में रक्षाबंधन की परंपरा उन बहनों ने डाली थी जो सगी नहीं थीं ,भले ही उन बहनों ने अपने संरक्षण के लिए इस पर्व की शुरुआत क्यों न की हो ,लेकिन उसकी बदौलत आज भी इस त्यौहार की मान्यता बरकरार है . 6 हजार साल पुराना है रक्षाबंधन का इतिहास ! इतिहास के पन्नो में देखें तो इस त्यौहार की शुरुआत 6 हजार साल पहले माना जाता है .इसके कई साक्ष्य भी इतिहास के पन्नो में दर्ज हैं .रक्षाबंधन की शुरुआत का सबसे पहला साक्ष्य रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ का है .

मध्यकालीन युग में मुस्लिमो और राजपूतों के बीच संघर्ष चल रहा था ,तब चित्तौड़ के राजा बिधवा रानी कर्णावती गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से अपनी और अपनी प्रजा की सुरक्षा का कोई रास्ता न निकलता देख हुमायूँ को राखी भेजी थी .तब हुमायूँ ने उनकी रक्षा कर उन्हें बहन का दर्जा दिया था .इतिहास का दूसरा उदाहरण कृष्ण और द्रौपदी को माना जाता है .कृष्ण भगवान ने राजा शिशुपाल को मारा था .युद्ध के दौरान कृष्ण के बाएं हाथ की ऊँगली से खून बह रहा था इसे देखकर द्रौपदी बेहद दुखी हुई और उन्होंने अपने साड़ी का टुकड़ा चीरकर कृष्ण की ऊँगली में बाँध दी ,जिस से उनका खून बहना बंद हो गया . कहा जाता है की तभी से कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था . सालों के बाद जब पांडव द्रौपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चिर हरण हो रहा था ,तब कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी .

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