उत्तराखंड: 625 फर्जी डीएल, आरोपी सिर्फ एक दलाल

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देहरादून (ब्यूरो)- संभागीय परिवहन कार्यालय देहरादून में हुआ कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस घोटाला जांच के हवाई दावों में ही दफन हो गया। अक्टूबर 2014 में सामने आए इस घोटाले में तत्कालीन परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश ने परिवहन आयुक्त को विभागीय जांच सौंपी थी। इसके साथ ही डालनवाला थाने में आरोपियों पर एफआइआर भी दर्ज कराई गई थी। वहीं, पुलिस ने सिर्फ एक दलाल को इस घोटाले का सूत्रधार व आरोपी बनाकर चार्जशीट दाखिल कर दी और विभाग ने भी तीन कर्मियों के तबादले कर पल्ला झाड़ लिया।

सवाल यह उठ रहा है कि जब विभागीय जांच में भी सामने आया था कि एआरटीओ की आइडी व पासवर्ड से छेड़छाड़ कर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया तो पुलिस ने मामले की परतें उधेड़ने की कोशिश क्यों नहीं की।

संभागीय परिवहन कार्यालय से फर्जी दस्तावेजों पर करीब सवा छह सौ कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए थे। यह मामला दस्तावेज जांच में पकड़ा गया था। कॉमर्शियल डीएल हासिल करने के लिए आवेदक को झाझरा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग टे्रनिंग एंड रिसर्च आइडीटीआर) से ट्रेनिंग सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है

आवेदकों ने जो सर्टिफिकेट लगाए थे, वे जांच में फर्जी पाए गए। विभाग की ओर से प्रारंभिक जांच की थी तत्कालीन एआरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी ने। उन्होंने आइडीटीआर के रेकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि आवेदकों के सर्टिफिकेट के सीरियल नंबर वहां के रेकॉर्ड से मिलते ही नहीं।

कॉमर्शियल डीएल आवेदक को सौंपने से पूर्व उसके ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की ऑनलाइन जांच होती है, मगर यह प्रक्रिया हुई ही नहीं। अगर होती तो मामला जल्द ही पकड़ में आ जाता। आरोप था कि घोटाला आरटीओ कर्मियों की मदद से अंजाम दिया गया। जिसमें एक दलाल को सूत्रधार बताया गया था।

तत्कालीन परिवहन मंत्री ने मामले की उच्च स्तरीय जांच तत्कालीन परिवहन आयुक्त एस. रामास्वामी को सौंपी, लेकिन उनकी पदोन्नति के बाद जांच अपर आयुक्त के पास आ गई। अपर आयुक्त की जांच में संदेह के घेरे में आए तीन कर्मचारियों को दूसरे कार्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया। इनमें एक महिला कर्मी भी शामिल थी। वहीं, पुलिस ने भी एक दलाल गोपाल भट्ट के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर इतिश्री कर ली।

मोबाइल नंबर के आधार पर बनाया एक ही आरोपी-
आरटीओ ऑफिस की तरफ से पुलिस को दी गई तहरीर में एक मोबाइल नंबर बतौर आरोपी दिया गया था। बताया गया था कि यह नंबर एक दलाल का है। इसी दलाल ने आवेदकों को प्रमाण पत्र व लाइसेंस बनाने की डील की थी। इसी को आधार बनाकर पुलिस ने दलाल के विरुद्ध चार्जशीट दी |

आइडीटीआर भी था संदेह के घेरे में-
मामले में आइडीटीआर की भूमिका भी पूरी तरह साफ नहीं थी। लाइसेंस के लिए जो सर्टिफिकेट लगाए गए थे, वे हू-ब-हू असली जैसे थे। आशंका जताई गई थी कि सर्टिफिकेट आइटीडीआर में ही फर्जी ढंग से बने हैं या फिर इन्हें उस जगह से लिया गया, जहां इनकी छपाई होती है।

उचित कदम उठाए गए-
अपर आयुक्त परिवहन सुनीताल सिंह के मुताबिक इस मामले में जांच के बाद विभाग ने उचित कदम उठाए हैं। ऐसी घटनाएं रोकने के लिए गोपनीय रणनीति भी बनाई गई है।

मामला अदालत में विचाराधीन –
एसपी सिटी अजय सिंह के अनुसार पुलिस ने जांच के आधार पर एक आरोपी गोपाल भट्ट के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की है। मामला अदालत में विचाराधीन है।

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