योगी सरकार के 75 दिन दलित उत्पीड़न, बलात्कार व सांप्रदायिक भेदभाव के

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चंदौली(ब्यूरो)- चन्दौली प्रदेश में आदित्यनाथ योगी सरकार के 75 दिन दलित उत्पीड़न, बलात्कार व सांप्रदायिक भेदभाव के रहे हैं। कानून-व्यवस्था के नाम पर आई योगी सरकार में यदि किसी चीज का अता-पता नहीं है, तो वह खुद कानून-व्यवस्था ही है। इसके अलावा, सरकार द्वारा जोर-शोर से घोषित की गई किसान कर्जमाफी की गाइडलाइन का क्या हुआ- ढाई महीने बाद भी यह स्पष्ट नहीं है। उक्त विचार जनमंच के नेता अजय राय ने व्यक्त की।

उन्होने कहा कि सहारनपुर के शब्बीरपुर में पांच मई को दलितों पर ठाकुर जाति के सामंतों का जानलेवा हमला हुआ, दलितों के घर जलाये गये। पांच मई की घटना के बाद भी उन पर हिंसक हमले हुए। लेकिन पीड़ित दलितों को न्याय नहीं मिला है। योगी सरकार दबंग हमलावरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय उनके पक्ष में झुकी नजर आ रही है।

उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में दलित असुरक्षित है ।जनमंच सहारनपुर की घटना पर न्याय और लोकतंत्र के लिए संघर्ष जारी रखेगी। ग्रेटर नोएडा में हाई वे के निकट जेवर में स्क्रैप (कबाड़) व्यापारी के परिवार की महिलाओं के साथ गैंगरेप व हत्या की 25 मई की खौफनाक घटना योगी सरकार में कानून-व्यवस्था की हालत बताने के लिए काफी है।

वाराणसी में मंडुआडीह थानाक्षेत्र में बीती 11 मई को छह साल की नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ और थानाघ्यक्ष ने सभी दुराचारियों को पकड़ने की बात तो दूर, घटना की सही एफआईआर तक दर्ज नहीं की। रामपुर जिले के टांडा में सड़क मार्ग से जा रही दो लड़कियों का दर्जन भर से ऊपर शोहदों ने बीच रास्ते यौन उत्पीड़न किया। लखनऊ से जा रही सहारनपुर एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे में युवती के साथ बलात्कार हुआ। ये घटनायें तो बानगी हैं, हालत यह है कि नाबालिग बच्चियों के साथ सामूहिक दुराचार व महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं सूबे में उफान पर हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में खुद भाजपा के लोग कानून-व्यवस्था को हाथ में ले रहे हैं और योगी सरकार उनपर कार्रवाई से बच रही है। सहारनपुर में अंबेदकर शोभायात्रा के नाम पर बिना अनुमति जुलूस निकालने और एसएसपी के आवास पर हमला करने वाले भाजपा नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टे एसएसपी का ही तबादला कर दिया गया। योगी सरकार के इस तरह के व्यवहार से हमलावरों, दबंगों और सामंती ताकतों का मनोबल लगातार बढ़ रहा है। गौरक्षा की आड़ में भगवा गुंडागर्दी हो रही है।

सूबे में अल्पसंख्यक समुदाय खासकर कुरैशी समाज के लोगों के साथ सांप्रदायिक आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। नए बूचड़खाने खोलने, मीट व्यापारियों को लाइसेंस जारी करने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने के बजाय मीट व्यापार से जुड़े कुरैशी समाज के लाखों परिवारों को भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया गया है।

यही नहीं, प्रदेश की योगी और केंद्र की मोदी सरकार वैध-अवैध बूचड़खानों के नाम पर और पशु वध रोकने संबंधी ताजा केंद्रीय अधिसूचना (जिस पर मद्रास हाईकोर्ट ने चार हफ्ते की रोक लगा दी है) के जरिये नागरिकों के भोजन व्यवहार पर मनमाना नियंत्रण लागू कर संविधान प्रदत्त अधिकारों की खिल्ली उड़ा रही है।

योगी सरकार में लोकतंत्र की स्थिति यह है कि शांतपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वाले, गरीबों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले वामपंथी दलों, जनसंगठनों के नेताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। यही नहीं, मांस व्यापारियों को राहत देने वाले हाईकोर्ट के आदेश को लागू कराने की मॉग है।

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