8 साल की मासूम आसिफा की कहानी, जाने क्या है कठुआ गैंगरेप मामला…

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जम्मू-कश्मीर- आज हम बात करने जा रहे है देश का बहुचर्चित मुद्दा बने आसिफा केस की. कठुआ गैंगरेप जो इस वक्त न्यूज़ पेपर और अखबारो की सुर्खियां बना हुआ है. आज मै आपको बताउंगी कि क्या हुआ उस मासूम के साथ, महज़ 8 साल की थी आसिफा जिसके साथ 8 लोगो ने गैंगरेप किया, एक मंदिर में वो चार दिन भूखी बेसुध पड़ी रही लगातार उसका रेप होता रहा चार दिन तक उन हैवानो ने आसिफा की इज़्ज़त को तार तार किया, अपनी हवस की भूख मिटाने के बाद उन दरिंदो ने उस मासूम की हत्या करके उसे जंगल में फेंक दिया.

मामला शुरू होता है जम्मू कश्मीर के कठुआ क्षेत्र में बसे रसाना गांव से. जहां आसिफा सिर्फ दो समुदायो के बीच की लड़ाई का शिकार बन गई. रसाना में हिंदू समूदाय बकरवालो को पसंद नही करता था उनका आरोप था कि बकरवाल के लोग अवैध कामो में लिप्त रहते है और अक्सर इन दो समुदायो के बीच मारपीट होती रहती थी. इस काण्ड का मास्टरमाइंड था रिटायर्ड वर्चस्व आफिसर व मंदिर का पुजारी सांझीराम. 10 जनवरी को जब आसिफा जानवरो को जंगल में चराने गई जिसके बाद घर वापिस नही लौटी.

2 दिन बाद आसिफा के पिता ने हीरापुर पुलिस स्टेशन में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस अपने ढ़ीले रवैये के साथ मामले की तफ्तीश में लगी थी. 10 जनवरी को जब आसिफा जंगल में जानवरो को चरा रही थी तभी एक नाबालिक और उसके दोस्त मिंटू ने लड़की का अपहरण कर उसका रेप किया फिर सांझीराम के कहने पर वो दोनो उसे मंदिर में ले आए. जहां 4 दिन तक उसे रखा भूखा रखा गया, नशीली दवाएं दी गई और लगातार उसका रेप किया गया. 12 जनवरी को सांझीराम के बेटे विशाल को मेरठ फोन पर लड़की के बारे में इत्तला की गई विशाल इतना हवसी था कि मेरठ से आकर उसने बच्ची का रेप किया.

इस पूरे घटनाक्रम में दो स्पेशल पुलिस आफिसर्स भी शामिल थे. 14 जनवरी को लोहड़ी के दिन ये तय हुआ कि अब लड़की को मार देना चाहिए. हत्या के पहले दीपक खजुरिया समेत सभी ने एकबार फिर बच्ची का रेप किया. उसके बाद बच्ची को मारकर जंगल में फेक दिया गया. अपनी बच्ची के इस हाल पर मां बाप और पूरे कठुआ में और देखते ही देखते पूरे पूरे कश्मीर में प्रदर्शन हुए. जिसके बाद सरकार पर दबाव बना.

23 मार्च को मामला क्राइम ब्रांच को दे दिया गया. जिसके बाद सबसे पहले इस मामले के शुरूआती जांचकर्ता आनंद दत्ता व हेडकांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया गया है. जो इस मामले को दबा रहे थे और लगातार आरोपियों से पैसे ले रहे थे. आनंद दत्ता ने इस मामले को दबाने के करीब 5 लाख रूपये लिए थे. आनंद दत्ता की गिरफ्तारी के बाद मामले का सच सामने आया. सांझीराम सहित बाकी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. चार्जशीट तैयार हो गई अब लगा कि आसिफा को इंसाफ मिल ही जाएगा. मगर फिर कुछ ऐसा हुआ जिसका तो कोई अंदाज़ा भी नही लगा सकता था. उन आरोपियो को छोड़े जाने की मांग होने लगी. पीडीपी बीजेपी सरकार और कठुआ बार कांउसिल ने रैलियां निकाली. जिसमें मांग की गई कि आरोपी हिंदू है और एक मुस्लिम लड़की का रेप करने पर उनपर कोई कार्यवाही नही होनी चाहिए. इस विरोध में पीडीपी बीजेपी सरकार के दो मंत्री लाल सिंह चौधरी और चंद्र प्रकाश गंग अहम रोल में थे.

विरोध इतना तगड़ा था कि 9 अप्रैल को जब चार्जशीट कोर्ट में सम्मिट होनी थी लोगो के हंगामे के चलते चार्जशीट सम्मिट नही हो पाई. फिर कानून मंत्री की दखल के बाद 10 अप्रैल को चार्जशीट कोर्ट में सम्मिट हुई. फिलहाल मामला न्यायिक अधिकार में आ चुका है. आरोपी गिरफ्तार हो चुके है. पूरा देश और आसिफा के माता पिता इंसाफ की आस में कोर्ट के फैसले का इंतज़ार कर रहे है.

 

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