पूरे यूपी को दहलाने वाले हत्याकांड का मुख्य शाजिशकर्ता अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर

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रायबरेली (ब्यूरो)- क्षेत्र के अपटा गाँव मे हुए नरसंहार को सात दिन बीत चुके है। लेकिन पुलिस की विवेचना साक्ष्यों, बयानो और परिस्थितियों मे पूरी तरह तालमेल बनाने की कवायद मे उलझी हुई है एक हफ्ते की कवायद के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित है तो मुख्य साजिश कर्ता पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

26 जून की शाम क्षेत्र के अपटा गाँव मे 5 नवयुवको की दुर्दांत तरीके से हत्या करके उनकी लाश उनके सफारी में जला दी गयी थी। इस मामले मे क्षेत्र के भूसई का पुरवा मे रह रहे देवेश शुक्ला ने चार नामजद और चार अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी । नामजद आरोपियों और अज्ञात लोगो मे पुलिस अब तक कुल पाँच लोगो को जेल भेज चुकी है ।

मामले की जांच और विवेचना मे वैज्ञानिक तरीका अपनाया गया है। जिसमे रायबरेली और लखनऊ से आयी फारेंसिक टीम ने नमूने लिए। एडीजी कानून व्यवस्था से लेकर पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह पूरे घटना क्रम पर बारीकी से जांच कर चुके है। लेकिन बयान, साक्ष्य और परिस्थितियाँ अलग अलग कहानी बयां कर रहे है। ग्रामीणो ने पुलिस को दिये बयान मे कहा है कि ग्राम प्रधान के यहाँ आए लोगो ने ही पहले फायरिंग शुरू की थीं। लेकिन प्रधान के पक्ष के किसी व्यक्ति को खरोच तक नहीं लगी है।

ग्रामीण बताते है कि उनकी सफारी बिजली के खंभे से टकरा कर पलटी है, लेकिन परिस्थितियाँ बता रही है कि जीप को पलटा करके आग लगाई गयी। साक्ष्य कह रहा है कि मृतको पर फायरिंग हुई है जिसमे एक मृतक अनूप मिश्रा के जांघ मे गोली लगी, लेकिन उसको किस असलाहे से गोली मारी गयी और वह असलहा कहाँ है, ये सवाल विवेचना को उलझाए हुए है। मामला इतना पेचीदा बना हुआ है कि पुलिस अधीक्षक खुद गाँव मे पूरा दिन रहकर एक विवेचक की तरह हर साक्ष्य और बयान का सत्यापन कर चुके है। यही नहीं सबसे असली मामला घटना के कारण का है। कोई भी घटना अकारण नहीं होती है। इतनी बड़ी घटना के पीछे प्रमुख कारण क्या था ? यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। रोहित शुक्ल व उनके साथियों की हत्या के आरोपी राजा यादव से दोस्ती कैसे इतनी बड़ी दुश्मनी मे बदल गयी? जिससे नरसंहार हुआ। असल वजह की तलाश जारी है।

रिपोर्ट- राजेश यादव 

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