9 माह पहले मॉ से बिछड़े लाल को मिलवाकर मनाया मातृ दिवस, साथ कौमी एकता की मिशाल पेश की

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प्रतापगढ़ (ब्यूरों)- मातृ दिवस पर किसी मां और बेटे के लिए इससे बड़ा उपहार और क्या हो सकता है कि 9 माह तक बिछड़ने के बाद वे मिल जाए। भले ही सुनने में ये घटना पूरी फिल्मी लगें लेकिन सच्चाई यही कि 9 माह बाद मातृ दिवस के समीप ही एक माँ को एक बेटे से अखण्ड भारत के पत्रकार ने उसके घर जाकर मिलवाया।

औलाद का गम हर मॉ को तड़पाती है ! औलाद से बिछड़ने का दर्द क्या होता है, इसको औलाद से बिछड़ी एक मॉ ही समझ सकती है !अगर कोई उस मॉ को बिछड़े हुये बेटे से मिलवा दे, जिसको देखने के लिये मॉ की ऑखे पथरा गयी हो, और माँ की आंखों में उम्मीद भी खत्म हो गई हो कि पता नही कभी वो अपने औलाद को देख पाएगी भी या नही।

ऐसे में अगर कोई व्यक्ति उस मां को उसके बेटे से मिला दे तो वो मॉ उस शख्स को दुऑए देते नही थकती, कि एक बिछड़े हुये बेटे को मॉ से मिलवा दिया हो । बिछड़े मां बेटे को मिलाकर इंसानियत की मिशाल पेश की है |

अखण्ड भारत के पत्रकार पंकज मौर्य और नफीस सिद्दीकी ने।

मामला प्रतापगढ़ जिले के थाना मानिकपुर से जुड़ा है। बिछड़े मां बेटे को मिलाने का काम समाज सेवी और पत्रकार पंकज मौर्य और उनके साथी नफीस सिद्दीकी ने किया है।

बता दे कि मुजफ्फर अली पुत्र मन्सा अली निवासी दर्जिन गॉव ,चौकी बाबागंज ,थाना रुपड़िया, जिला बहराइच का रहने वाला था । पिछले नौ माह से वो घर से गायब हो गया था, मॉ-बाप बहुत ही गरीब थे, इसलिये ज्यादा खोजबीन नही कर पाये ! मॉ की हालत बेटे के गम को खाये जा रही थी, और हालत काफी खराब हो गयी थी ।

पिछले महीने यह लड़का मानिकपुर मे समाजसेवी पत्रकार पंकज मौर्या और नफीस सिद्दीकी को विछिप्त हालत मे मिला तो उससे पूताछ की गयी तो लड़के का मानसिक संतुलन गड़बड़ होने के कारण कुछ बोल नही पा रहा था !

किसी तरह उसके घर का पता लगाने के बाद उसको घर छोड़ने के लिये कल सोमवार को सुबह मानिकपुर से प्रतापगढ़ बस से रवाना हुये, प्रतापगढ़ से फैजाबाद होते हुये बहराइच जिला पहुचे वहॉ से बाबागंज पहुचकर उसके गॉव दर्जिनगॉव रात 11 बजे उसके घर पहुचे ।

बेटे को पाकर उसकी माँ की आंखो मे आंसू आ गये। रात को ही गॉव के लोगो ने दोनो लोगो को बहुत सराहा और धन्यवाद दिया !

उधर बच्चे को मॉ से मिलवाकर पंकज और नफीस ने इंसानियत के साथ – साथ हिन्दू मुस्लिम कौमी एकता की नयी मिशाल कायम की है, कि किसी की सेवा करने के लिये पद या कुर्सी की ही नही बल्की एक मानवता से भी कुछ अच्छा काम किया जा सकता है|

रिपोर्ट-विश्व दीपक त्रिपाठी

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