ग्लोबल वार्मिंग के चलते विलुप्त हो रहा है एक पूरा देश

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दुनिया का चौथा सबसे छोटा देश तुवालु विलुप्त होने की कगार पर है। तुवालु के प्रधानमंत्री एनेल स्पोआग ने अपने देश को विलुप्त होने से बचाने के लिए यूरोपिय देशों से मदद मांगी है |

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प्रधानमंत्री एनेल स्पोआग ने यूरोपीय संघ नेताओं से बातचीत करने सोमवार ब्रुसेल्स पहुंचे। जहां उन्होंने यूरोप से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन कम कर ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने की अपील की। वर्तमान में यह लक्ष्य 2 डिग्री सेल्सियस है। जलवायु परिवर्तन के चलते 10 हजार की आबादी वाला सबसे छोटा देश तुवालु डूब रहा है।

इसी साल दिसंबर महीने में पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर वार्ता होनी है। दुनिया में बढ़ते तापमान से समुद्री स्तर बढ़ रहा है और तुवालु इसकी चपेट में है, जो प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में कई द्वीप समूहों में से एक है।

पीएम एनेल ने कहा है कि अगर तुलावु डूबा तो इसका मतलब जलवायु परिवर्तन में बदलाव नहीं आया। इसलिए दुनिया को बचाने के लिए हमें तुवालु को बचाना होगा और मानवाजाति को मिटने से बचाने के लिए हमें एकजुट होने की जरूरत है लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजकर बचाया जा सकता है, पर यह कोई स्थाई विकल्प नहीं है, इससे जलवायु में परिवर्तन नहीं रुकेगा। उल्लेखनीय है कि तुवालु की आबादी सिर्फ 10 हजार है।

इस देश का सबसे ऊंचा स्थान भी समुद्र से सिर्फ चार मीटर ऊपर है। 26 वर्ग किलोमीटर में फैले तुवालु को 1978 में ब्रिटेन से आजादी मिली थी।

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