एक रेस्टोरेंट ने किया विकलांग निपुन का अपमान, जिसके बाद उन्होंने विकलांगों को समानता का एहसास कराने की शुरुवात की

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Nipun Malhotra

इसी साल 6 मार्च को मै अपने 8 दोस्तों के साथ दिल्ली के एक पब जाने वाला था पर पब की एक पालिसी के तहत पब प्रसाशन ने मुझे यह कहकर पब में जाने से रोक दिया कि पब में विकलांग लोगों को जाने की अनुमति नही है |

मैने खुद को अपमानित महसूस किया और क्रोध से भरकर मैंने 9:49 pm पर घटना के बारे में एक ट्वीट किया मुझे इसके व्यापक प्रभाव का थोड़ा बहुत एहसास तो था, दो घंटे के अंदर ही मेरे फ़ोन पर मीडिया, राजनीतिज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के कॉल्स की बाढ़ सी आ गयी, अगले दिन यह पूरी तरह से एक सैलाब की तरह बहार आया और अखबार तथा न्यूज़ चैनल इस घटना से भर गए और इसका प्रभाव यह हुआ कि मुझे बिखरे पड़े विकलांग समाज से बहुत सारा समर्थन मिलना शुरू हो गया, मेरी तरह और विकलांग लोग अपने साथ हुए भेदभाव के अनुभवों को मुझसे साझा करने लगे | सोशल और परम्परागत मीडिया के दबाव के चलते दिल्ली सरकार को घटना की मजिस्ट्रेट स्तर की जांच के आदेश देने पड़े |

मेरे साथ जो हुआ उसने बहुत सारे लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन किया मेरा एक दोस्त अपनी दृष्टिबाधित बहन को पहलीबार रेस्टोरेंट ले गया शुरुवात में मै अपने शुभचिंतक जो कि मेरे साथ हुए अन्याय के विरोध में एकजुटता प्रदर्शित कर रहे थे की कॉल्स का जवाब देता था पर जल्द ही मुझसे व्हीलचेयर के अनुकूल रेस्टोरेंट के बारे में पुछा जाने लगा, मै उनके इन सवालों का जवाब नही दे सका क्योकि मैंने दिल्ली के सभी रेस्टोरेंट नहीं देखें है, इस सबने मुझे मेरे बचपन और मेरे जीवन को सामान्य रूप से सामाजिक बनाने के मेरे माँ-बाप के संघर्षों की याद दिला दी |

मेरे जन्म से ही मुझे अर्थ्रोग्र्य्पोसिस ( एक जन्म से होने वाला विकार जो हाँथ और पैरों की मांसपेसियों को बढ़ने नहीं देती) की बीमारी थी, डा. के अनुसार मै एक लकड़ी के पुतले जैसा था, लेकिन मै बहुत खुशकिस्मत था कि मेरे माँ-बाप ने मुझे एक पूरी तरह से सामान्य जीवन देने का फैसला किया |

मेरे माँ-बाप ने मुझे विकलांगों के स्कूल भेजने के समाज के दबाव की परवाह न करते हुए मुझे एक सामान्य स्कूल में भेजा, उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया कि मै अपने उम्र के अन्य सामान्य बच्चों की तरह ही एक सामान्य जीवन जी सकूँ, स्कूल में मेरे दोस्त नहीं थे क्योंकि वहां पढने वाले बच्चों को यह पता ही नहीं था की एक विकलांग के साथ कैसा व्यवहार करते हैं इसलिए मेरा सामाजिक जीवन परिवार के साथ बाहर जाने तक ही सीमित था, हर शुक्रवार को बाहर जाकर खाना हमारे परिवार की प्रथा बन गयी और यह सप्ताह का सबसे अच्छा दिन होता था हम हर बार एक नए रेस्टोरेंट में जाते थे इस बात से अनजान कि मेरे माँ-बाप यह सुनिश्चित करने के लिए कि वो रेस्टोरेंट व्हीलचेयर अनुकूल है या नहीं पहले ही उस रेस्टोरेंट में जाकर आते थे ताकि मुझे किसी तरह की निराशा का सामना न करना पड़े |

जब मै बड़ा हुआ और कॉलेज पहुंचा मै खुशनसीब था और अपना एक मजबूत और संवेदनशील सामाजिक परिद्रश्य बना लिया था मेरे साथ रह कर मेरे दोस्त एक व्हीलचेयर अनुकूल रेस्टोरेंट को समझ पाए बाहर खाने के उनके फैसलों में मुझे उनके द्वारा चुनी जगह की अनुकूलता पर यकीन होने लगा |

पिछले सप्ताह मै अमेरिका के केल्लोग्स स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट में एक हफ्ते का शैक्षिक कोर्स में शामिल हुआ, मै इटैलियन खाने का शौक़ीन हूँ और मैंने अपने एक साथी से कोई व्हीलचेयर अनुकूल रेस्टोरेंट सुझाने को बोला, उसने तुरंत YELP (रेस्टोरेंट सर्च की एक पसिद्ध app) पर login किया जिसमें यह चेक करने की सुविधा उपलब्ध है कि कौन सा रेस्टोरेंट विकलांग लोगों के अनुकूल है और कौन सा नहीं मैं तुरंत ही भारत में कुछ ऐसी ही शुरुवात के बारे में सोंचने लगा |

भारत वापस आकर मैंने ZOMATO के ग्लोबल कंटेंट हेड से संपर्क किया उन्होंने मेरे इस सुझाव का सम्मान किया और कहा यह सिर्फ विकलांग नही बल्कि वृद्ध लोगों की तेजी से बढती संख्या के लिए भी कारगर होगा कैसे ZOMATO ने बातचीत के तुरंत बाद उसी दिन से इस काम की शुरुवात की इससे मै बहुत प्रभावित था और यह आश्वासन भी दिया की अगले 2 हफ़्तों में देश के 6 मेट्रो शहरों में यह सुविधा उपलब्ध होगी |

यह शुरुवात एक बड़ा बदलाव ला सकती है जब रेस्टोरेंट्स से यह पूछा जायेगा की क्या वे व्हीलचेयर अनुकूल हैं वे इस बात पर ध्यान देंगे और खुद को अनुकूल बनाने की कोशिश करेंगे| मै आशा करता हूँ कि इसका अनुकूल प्रभाव bookmyshow, housing.com और ola तथा uber जैसी अन्य सेवा प्रदाता कंपनियों में भी दिखें, और वे भी अपने सेवाओं में विकलांग अनुकूल सेवाओं को शामिल करें |

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