राहुल गाँधी की रैली के लिए किसान की पूरी फसल को बर्बाद कर दिया गया

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हमारे देश की राजनीति में असंवेदनशीलता की हद हो गयी है, और जिन गरीब और पिछड़े किसानो का नाम लेकर ये वोट मांगते हैं उन्हीं अन्नदाता किसानो की हालत सबसे बुरी है |

इस साल मानसून की मार किसानो पर कुछ कम नहीं है ऐसे में कर्नाटक के गुदगुर गाँव के एक किसान नीलप्पा के खेतों के लगभग तीन फुटबॉल मैदानों के बराबर खेतों की फसल अधपकी अवस्था में सिर्फ इसलिए काट डाली गयी कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी वहां रैली करने वाले थे और उनकी रैली के लिए उस स्थान का चुनाव किया गया था |

खुद को किसानो का सबसे बड़ा शुभचिंतक बताने वाली कांग्रेस का कहना है कि किसान ने अपनी फसल खुद काटी है क्योंकि वह कांग्रेस का समर्थक है |

जबकि अगर Deccan chronicle: में छापी रिपोर्ट की माने तो गाँव के किसान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के डर के कारण अपना विरोध दर्ज नहीं करा सके | खेत के मालिक नीलप्पा ने बताया कि आधी फसल (करीब 40,000) का नुक्सान तो पहले ही मानसून की वजह से हो चुका था, मै फसल को करीब एक महीने बाद काटकर नुकसान को कम से कम करना चाहता था, पर क्योकि उन लोगों ने रैली के इस जगह का चुनाव किया मुझे अपनी फसल गवानी पड़ी | मेरी तकलीफ तब और बढ़ गयी जब अधिकारीयों ने कोई भी मुआवजा देने से इनकार कर दिया |”

और विडंबना तो यह है कि यह सब तब हो रहा है जब कांग्रेस उपाध्यक्ष पिछले कुछ महीनों से खुद को किसानो के मसीहा के रूप में दिखाने की कोशिश में लगे हैं और उनकी यह रैली भी किसानो के समर्थन में ही थी | इस प्रकार कि राजनीति की वजह से ही किसानो में असंतोष दिन – प्रतिदिन बढ़ रहा है और वे आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं | हमारे नेताओं की कथनी और करनी में सदैव ही अंतर रहा है |

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