भारतीय खेल व्यवस्था की कहानी एक जिमनास्ट की जुबानी

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मै बॉम्बे की एक जिमनास्ट हूँ, पर हाल ही में अपने शौक की वजह से मैंने हमारी सरकार के बारे में बहुत कुछ जाना है, हमारे (खिलाडियों) पास न के बराबर सुविधाएँ हैं, और सरकार की तरफ से प्रयोजन न्यूनतम, जब मै स्कूल गेम्स में भाग लेने के लिए ब्राज़ील गयी, मै दूसरे देश की सरकारों की तरफ से उनके खिलाडियों को मिलने वाली सुविधाओं को देख अचंभित थी। वास्तव में पहली बार, वहां पर मैंने मैट्स पर प्रदर्शन किया, क्योंकि यहां भारत में हमे वो उपलब्ध नही करवाई जाती।

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जहां एक तरफ रुस और चीन जैसे देश खिलाडियों की पोशाकों और उपकरणों पर हज़ारों डॉलर खर्च करते हैं वहीं हमारे यहां या तो वो उपलब्ध ही नही होते और अगर हुए भी तो घटिया क्वालिटी के होते हैं, कई बार तो अपने उपकरणों का इंतज़ाम हमें खुद के पैसों से करना पड़ता है।

कब हम खेलों के प्रति रूचि ( क्रिकेट छोड़कर ) का सम्मान कर पाएंगे और कब इस भ्रस्टाचार की राजनीति में परिवर्तन होगा ……?

 

 

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