नौरंगा व शिवरामपुर घाट पर बने पीपा पुल को खोल दिये जाने से एक लाख की आबादी प्रभावित  

प्रतीकात्मक

बलिया(ब्यूरो)- गंगा नदी के नौरंगा व शिवरामपुर घाट पर बने पीपा पुल को खोल दिये जाने से लगभग एक लाख की आबादी का आवागमन प्रभावित हो गया है। सम्भावित बाढ़ को देखते हुए पुल तो खोल दिया गया, लेकिन प्रशासनिक स्तर से वैकल्पिक इंतजाम न होने से लोगों को अपने बूते नदी पार करना पड़ रहा है। नौकाओं पर दो पहिया वाहन तो किसी प्रकार पार हो जा रहे हैं मगर चार पहिया वाहनों को बिहार सीमा से होकर बलिया जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है। आवागमन के अलावा सबसे गंभीर समस्या चिकित्सा सुविधा की है। कई गांवों के लोग पीपा पुल से होकर दवा-इलाज के लिए बलिया शहर जाते रहे हैं, मगर अब यह सुविधा भी बाधित हो गई है। अब लोगबाग बिहार सीमा में ही इलाज पर निर्भर हो गये हैं।

नौरंगा व शिवरामपुर घाट के बीच पीपा का पुल गंगा में पानी बढ़ने के साथ खोल दिया जाता है। इस साल जून में इन दोनों पुलों को खोल दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने अतिरिक्त नाव आदि की व्यवस्था नहीं की। इसके चलते नौरंगा, भुआलछपरा, चक्की नौरंगा, उदयीछपरा के डेरा, जवहीं, बेयासी (27 टोला), परानपुर आदि की करीब एक लाख की आबादी का सम्पर्क पूरी तरह टूट गया है। नदी में पानी बढ़ने के साथ ही धारा भी तेज हो गयी है। ऐसे में लोगों को नदी पार करने में भारी दिक्कत हो रही है। 15 मिनट की दूरी तय करने में दो से ढाई घंटे लग रहे हैं।

इलाज से पहले अस्पताल पहुंचने की चुनौती- गंगा पार गांवों के मरीजों के सामने दवा के लिए अस्पताल पहुंचने की बड़ी चुनौती है। नदी पार के गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। ऐसे में इलाज के लिए जिला मुख्यालय का ही सहारा है। नौरंगा के प्रधान प्रतिनिधि राजमंगल ठाकुर ने कहा कि प्रशासन को गांवों में चिकित्सा व्यवस्था का इंतजाम करना चाहिए।

 

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