आदरणीय काशी के समस्त बंधुओं को सादर प्रणाम

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वाराणसी (ब्यूरो)- वाराणसी इधर बीच लगातार मीडिया के जरिए खबरें पढ़ने को मिल रही है कि काशी विश्वनाथ मंदिर से लगायत ललिता घाट तक की बस्ती साफ कर दी जाएगी, गंगा को मंदिर के द्वार तक लाया जाएगा। मैं बता दूं इस योजना के निर्माताओं को भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी शहर के भूगोल की जानकारी नहीं है, और ना ही इसकी प्राचीनतम ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत से ही ये बुद्धिमान लोग अवगत है। जिस बस्ती को जमींदोज करने की बात चल रही है वह त्रिशूल पर बसी काशी के मध्य त्रिशूल यानी विध्य पर्वत माला की तीन छोटी पहाड़ियों में से एक विशेश्वर पर्वत पर स्थित है। वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर की उम्र भले ही चार सौ साल का रहा हो मगर विशेश्वर पहाड़ी का इतिहास हजारों साल का रहा है। इसका अस्तित्व तो माँ गंगा के धरती पर अवतरण से भी पहले का है।

जिस इलाके को मिटाने की साजिश रची जा रही है। उसके दो सौ मीटर की परिधि में अनगिनत साहित्यकार, कर्मकांडी, महामहोपाध्याय, चिकित्सक आईएएस व पीसीएस अधिकारी, पत्रकारों की जन्म व कर्मस्थली रही है। उनकी निशानियों को संरक्षण देने की बजाय उन्हें मिटाने का कुचक्र तथाकथित ‘गंगा दर्शन’ अभियान के बहाने रचा जा रहा है।

इसी सन्दर्भ में कल रविवार 14 मई को सुबह 9 बजे काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप सरस्वती फाटक स्थित बाल उद्यान में समस्त काशी के जनता आमंत्रित है। पत्रकार बंधुओं को भी विशेष आंमत्रण ताकी वे देश दुनिया को सच्चाई बतलाए किस तरह से काशी के अस्तित्व को मिटाने की साजिश रची जा रही है।

सभा को वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा जी, महामृत्युंजय मंदिर परिवार के सदस्य किशन दीक्षित के अलावा शहर के संभ्रात साहित्यकार, पत्रकार व समाजसेवी सम्बोधित करेंगे।

रिपोर्ट- बृजेन्द्र बी. यादव

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