आज का जल दोहन कल की बड़ी समस्या : आलोक तिवारी

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रानीगंज,प्रतापगढ़:-आज विश्व जल दिवस के मौके पर समाजसेवी आलोक तिवारी एक कार्यक्रम के दौरान अपनी भावना को व्यक्त करते हुये और जल दोहन पर चिंता व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा कि आज इस जल दिवस मना रहे सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं, समाज सेवियों तथा कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न रूपों से मनाया जाएगा।कल के अख़बार की सुर्खियों में जल दिवस संबंधी आयोजनों की ख़बरें रहेंगी ।आज जिस तरीके से जबर्दस्त जल दोहन हो रहा है , वो भविष्य के लिए बहुत बड़े खतरे की घंटी है। मीठा जल जो पीने योग्य है, वो अत्यंत सीमित मात्रा में ही धरती पर है।

सिचाईं अत्यंत आवश्यक है खेती किसानी के लिए इस हरित क्रांति के दौर में हमारे राज्य में अनेक लोगों ने निजी ट्यूबवेल लगवाये। और सबसे बड़ी बात यह है कि ये ट्यूबवेल आवासीय क्षेत्र( आबादी) के बीच बड़ी संख्या में लगाये गए। उस ज़माने में लोग कुओं आदि से पानी पीते थे , इसलिए पीने वाले पानी की कोई विशेष दिक्कत नही थी। किन्तु समय के साथ कुओं का स्थान हैंडपंप ने ले लिया।सरकार भी गांव गांव पेयजल मिशन के नाम पर हैंडपंप लगवाने लगी।
अब आज जब आबादी के बीच सिचाईं के लिए एक साथ 4-4 ट्यूबवेल जब चलते हैं, तो पूरे गांव के हैंडपंप पानी उगलना बंद कर दे रहे हैं,और ये आबादी के लिए भविष्य का एक बहुत बड़ा खतरा है।

क्या आबादी के बीच टयूबवेल होना चाहिए ? क्या टयूबवेल से सिंचाई के मानक निर्धारित नहीं किये जाने चाहिए? जितने जल में सिचाईं हो सकती है, उससे कई हज़ार गुना जल व्यर्थ में बह जाता है टयूबवेल से सिंचाई के नाम पर,इसकी रोकथाम के लिए तत्काल प्रयास करने होंगे अन्यथा भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा उत्पन्न हो जाएगा।धरती में पीने योग्य जल सीमित मात्रा में है ।जब जल ही नहीं रहेगा किसी गाँव की धरती में , तो कैसे रहेगी वहां आबादी पलायन को मजबूर होगी वो।और ये कड़वी सच्चाई है जो मैंने महसूस किया है।विश्व जल दिवस पर इस गंभीर समस्या की और ध्यान देकर ही हम इस दिवस को सार्थक कर सकते हैं।क्योंकि जल ही जीवन है और जल है तभी कल है अतः हम सभी को आज सपथ लेनी चाहिये कि हम सब जल का संरक्षण करके अपनी जीवन की रक्षा करेंगे,जल बर्बाद नही करेंग

रिपोर्ट – रूपेंद्र शुक्ल

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