आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं

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आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं

उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही

काँपने लगते हैं I हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत हैं !


जो ब्यक्ति विकास के लिए खड़ा हैं

उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी

उसमें अविश्वास करना होगा और इसे चुनौती भी देनी होगी !!

bhagat singh5

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