आफगान बनने की राह पर चला झारखण्ड का यह जिला

0
155

afeemचतरा – कभी उग्रवादियों की शरणस्थली रही चतरा जिला अफीम की अत्यधिक खेती के कारण अब अफगान बनने की राह पर है। दरअसल आपको बता दें जिले की तकरीबन बीस फीसदी भूमि पर अफीम के पौधे लहलहा रहे हैं। वनों से घिरी हुयी चतरा जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में हजारों एकङ में अफीम की खेती की गयी है।

बता दें कि वन विभाग की हद तो यह है उसे यह भी नहीं पता है कि अब तक कितनी भूमि में अफीम की खेती हो रही है। जबकि पुलिस का मानना है कि वन विभाग की मिली भगत से ही अफीम की खेती यहाँ पर संभव है। अफीम की खेती से पूरा चतरा जिला लहलहा रहा है। जिले का तक़रीबन पचास फीसदी हिस्सा वनों से आच्छादित है और वन भूमि में सबसे ज्यादा अफीम की खेती की गयी है।

आपको बता रहे है कि अफीम के खेतों से घिरा हुआ यह स्थल है चतरा जिला के कुंदा प्रखंड के टटेज और उसके आस-पास के गांवों का। जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में नदियों के किनारे हजारों एकङ में अफीम की खेती की गयी है। बताते चले कि चतरा जिला के लावालोंग,सिमरिया,गिद्धौर,राजपुर,हंटरगंज,प्रतापपुर,टंडवा सहित सभी प्रखंङों में अफीम की खेती की गयी है।दरअसल आपको यह भी बता देते है कि अफीम की खेती के लिये सबसे उपयुक्त भूमि वनों की होती है।

अफीम खेती को नष्ट करने के लिये चतरा के एसपी अंजनी कुमार झा एवं पुलिस की पूरी टीम पहुंची। बता दें कि अफीम की इस तरह से खेती देखकर एसपी भी काफी हैरान हुये। पुलिस महकमा का हरेक अधिकारी अफीम खेत को नष्ट करने में लगा रहा।हाथों में डंडा लेकर एसपी अंजनी कुमार झा,एएसपी अ·िानी मिश्रा,एसडीपीओ,एवं अन्य पुलिस अधिकारियों ने तकरीबन बीस एकङ में लगी अफीम के फसल को नष्ट किया|

एसपी अंजनी कुमार झा ने कहा कि वन विभाग की संलिप्तता की जांच की जा रही है।उन्होंने यह कहा कि जिले में तकरीबन 90 फीसदी वन भूमि में ही अफीम की खेती हो रही है। वन विभाग के पास स्टाफ की है बेहद कमी – वन संरक्षक अधिकारी वही आपको बता दें कि दूसरी तरफ वन विभाग के वन संरक्षक एस के गुप्ता ने सबसे पहले तो स्टाफ की कमी का रोना रोया और सबसे आश्चर्य की बात है कि विभाग को इन बात का अन्दाज नहीं है कि जिले कि कितनी भूमि पर अफीम की खेती हो रही है। लेकिन उन्होंने यह जरुर कहा कि सब काम अंदाज से ही होता है।वन संरक्षक ने यह भी बताया कि आरोप लगाना आसान है।

पिछले कई वर्षों से हो रही है यहाँ अफीम की खेती –
यह भी बता देते है कि चतरा जिला पिछले कई वर्षों से अफीम की खेती के लिये बदनाम रहा है।दरअसल वन,पुलिस,नक्सलियों के तिकङी गठजोङ के कारण अफीम की खेती का यह कारोबार फल-फूल रहा है और सभी विभाग एक दूसरे पर ठिकरा फोङने का बहाना बना रहे हैं।

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY