आसाराम आश्रम बना अपराधियों की शरण स्थली

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प्रतीकात्मक फोटो

मैनपुरी (ब्यूरो)-  सन्त सेवा के नाम पर अवैध रूप से जाल-साजी कागज बनाकर देवी रोड स्थित आशाराम बापू आश्रम पर कब्जा करने वालों ने वहाँ सन्त समागम की बजाए अवैध धन्धों का कारोबार आरम्भ करा दिया है।  शाम होते ही अपराधियों की जमावड़ों के बीच जैसा सतसंग होता है उससे पड़ोसी और राहगीर भी खासे परेशान हैं।  इलाका पुलिस उसे सतसंग स्थल मानते हुए उन पर कार्यवाही करने से कतरा रही है।

व्यवसायिक सन्त आशाराम बापू द्वारा जब जनपद में अपना मायाजाल फैलाया गया तो उन्होंने कटरा निवासी कृष्ण अवतार सर्राफ से उनके द्वारा खरीदी गयी जमीन पर सतसंग करने के नाम पर मांग ली थी।  धीमे-धीमे आशाराम का माया-जाल ऐसा फैला कि उन्होंने कृष्ण अवतार के व्यवसायिक धन्धों पर भी हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया।  इसी बीच आशाराम की राम कहानी अपराध कहानी में बदल गयी तो आगरा के अपराधियों ने इस आश्रम पर जालसाजी के द्वारा कुछ कागज तैयार कर अपने को इस जमीन का स्वामी बताना आरम्भ कर दिया।

इस सम्बन्ध में एक केस न्यायालय में विचाराधीन है।  पता चला है कि आशाराम और उनके पुत्र नारायण साईं के जेल जाने के बाद से उनके क्षेत्रीय भक्तों द्वारा आशाराम आश्रम के नाम पर एकत्र की गयी सम्पत्ति और जमीनों पर कब्जे कर स्वयं को मालिक दर्शाना आरम्भ कर दिया है।  केस विचाराधीन होने के साथ ही यहाँ से अधिकांश सन्त भाग चुके हैं।  केवल अपराधियों का जमावड़ा शाम होते ही लगने लगता है।  लोगों का आरोप है कि यहाँ अवैध शराब और ताड़ी बेंचने का कारोबार चल रहा है।  वहीं दूसरे जनपदों से अपराध करके भागे अपराधियों की शरण स्थली बन चुका है आश्रम।  राहगीरों का कहना है कि यहाँ रहने वाले कुछ अपराधी तत्व उन्हें परेशान करते हैं तथा बाजार में सब्जी, दूध बेंचने जाने के दौरान अवैध बसूली करते हैं।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा

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