टीपू को अत्याचारी कहने से पहले जानें यह बातें

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देश के इतिहास को स्वर्णिम बनाने में अनेकों अनेक योद्धाओं ने अपना योगदान दिया है, जब से हमनें भारत के इतिहास को पढना आरम्भ किया है हमनें पढ़ा है कि टीपू एक महान शासक था जिसने अपने राज्य की जनता की सुरक्षा और भलाई के लिए अनेकों काम किये है उनके कई उदहारण भारत के स्वर्णिम इतिहास के पन्नो में दर्ज है I

जब अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ने वालों को हम राष्ट्र भक्त कहते है तो टीपू पर आरोप क्यों ?

भारत के इतिहास को जब भी हम देखते है हमें एक बात साफ़ तौर पर लिखी हुई मिलती है कि जितने भी लोगों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था हम उन्हें राष्ट्र का रक्षक मानते आये है तो आज उस टीपू सुलतान का विरोध हम क्यों कर रहे है I टीपू ने तो अपना पूरा जीवन ही राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए न्यौछावर कर दिया था I अपने जीवन के प्रारंभ से ही उसने अपनी बहादुरी से अंग्रेजों के सामने घुटने टेकने से साफ़ मना कर दिया और इतना ही नहीं अंग्रेजों को मंगलौर की संधि के लिए विवश भी किया था I

जब बड़े-बड़े राजा महाराजा अंग्रेजों के सामने घुटने टेक रहे थे तब टीपू ने रखी थी भारत माता की लाज –

जब अंग्रेजों ने भारत में प्रवेश किया और अपना आधिपत्य स्थापित करना शुरू किया और पहले मराठों को पराजित किया तो उसके बाद निजामों ने अंग्रेजो के सामने अपने अस्त्र शस्त्र डाल दिए थे ऐसे में टीपू ही एक ऐसा सुल्तान था जिसने भारत माता की लाज रखी थी और हथियार नहीं डाले थे I इतना ही नहीं उसने अंग्रेजों की मदद करने वाले मराठों और निजामों को भी पराजित किया था I

आधुनिक भारत के विज्ञान की नींव भी टीपू ने ही रखी थी –

भारत के मिसाइल मैंन कहे जाने वाले डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपनी किताब विंग्स ऑफ़ फायर में साफ़ लिखा है कि जब उन्होंने नासा का दौरा किया था तब उन्होंने नासा के म्यूजियम भारत के सुल्तान टीपू की राकेट की एक पेंटिग देखि थी जिसे देख वह दंग रह गए थे I

क्योंकि जिस ज़माने में टीपू सुल्तान ने राकेट की खोज और उसका प्रयोग शुरू किया था उस जमाने में पूरी दुनिया इस ज्ञान से दूर थी और पूरी दुनिया को राकेट का रा भी नहीं पता था I शायद ही यही कारण था कि स्वयं मिसाइल मैंन ने टीपू सुल्तान को दुनिया का पहला मिसाइल मैन कहा था I

जिस व्यक्ति ने देश के उत्थान के लिए इतने सारे कार्यक्रम किये थे उस व्यक्ति के बारे में ऐसे आरोप लगाना मेरी द्रष्टि से तो उचित नहीं है I

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