महिला डाक्टर के अभाव में दर-दर भटकती प्रसूताएं

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खीरों/रायबरेली(ब्यूरो)- आसमान से बरसती आग, मौसम के तल्ख तेवर और रोज बदलते मिजाज से क्षेत्र में आए दिन सैकड़ों की संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं । इस समय सीएचसी खीरों का आलम यह है कि लगभग 300 से अधिक मरीज प्रतिदिन अपना इलाज कराने सीएचसी पहुँच रहे है । जिनमें लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं और युवतियाँ हैं तथा शेष पुरुष और बच्चे हैं । सूबे की सरकार ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फेरबदल किया है । ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार भले ही गम्भीर हो । जिसके चलते एक महिला डाक्टर और दो पुरुष डाक्टरों को खीरों ब्लॉक के सीएचसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में तैनात किया गया है । लेकिन जमीनी हालात इससे अलग हैं । सीएचसी खीरों में महिला डाक्टर न आने से प्रसूताओं और महिला रोगियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।

विगत दो सप्ताह पूर्व सीएचसी खीरों में महिला डाक्टर के रूप में डॉ मुक्ता भारती की तैनाती कर दी गई है । उन्होने दो सप्ताह पूर्व कार्यभार ग्रहण कर लिया था । तब से मात्र एक दिन डॉ. मुक्ता भारती ने आकर दर्शन तो दिये लेकिन एक भी मरीज का इलाज नहीं किया और न ही प्रसव कराया । महिला डाक्टर के अभाव में संविदा पर तैनात स्टाफ नर्स प्रसूताओं से उगाही कर प्रसव करा रही हैं । जो तीमारदार पैसे देने में असमर्थ होता है । उसकी प्रसूता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है ।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि डॉ मुक्ता भारती के पति सीतापुर जनपद में डाक्टर के रूप में तैनात हैं । वह सीएचसी खीरों में कार्यभार ग्रहण करने के बाद केवल एक दिन के लिए अपने डाक्टर पति के साथ सीएचसी पहुँची थी । दो दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर चली गई थी । तब से दोबारा वापस नहीं आई और सीतापुर में ही रह रही हैं ।

इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र देवगाँव और दृगपालगंज में लम्बे अर्से से कोई डाक्टर न होने से क्षेत्रीय मरीजों को लम्बी दूरी तय करके इलाज के लिए खीरों आना पड़ रहा है या फिर मजबूर होकर झोला छाप डाक्टरों के शोषण का शिकार हो रहे हैं । विभागीय सूत्र बताते हैं कि विगत एक सप्ताह पूर्व 30 मई को डॉ मनोज मिश्रा को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बाबूगंज ऊंचाहार से स्थानांतरित कर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र दृगपालगंज में और डॉ जितेन्द्र कुमार यादव को सीएचसी बेलाभेला से देवगांव भेजा गया है । लेकिन आज तक दोनों डाक्टरों ने अपना कार्यभार भी ग्रहण नहीं किया है । महिला डाक्टर और दोनों डाक्टरों के न आने से क्षेत्र में व्यापक आक्रोश है । सीएचसी अधीक्षक डॉ यू सी वर्मा ने बताया कि महिला चिकित्सक न होने से सबसे अधिक परेशानी प्रसव और महिला रोगियों का इलाज करने में आ रही है । विभाग द्वारा महिला चिकित्सक की तैनाती की गई है लेकिन वह नहीं आ रही है । एक दिन आकर दो दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर गई थी । उसके बाद नहीं आ रही हैं । उन्हे प्रतिदिन अनुपस्थित किया जा रहा है । शीघ्र ही विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया जाएगा । पुरुष डाक्टरों ने अभी तक अपना कार्यभार ग्रहण नहीं किया है ।

रिपोर्ट- आशीष शुक्ला

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