छुआ-छूत के चलते अध्यापक के सामने ही हुई मारपीट

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कबरई/महोबा(ब्यूरो)- कबरई ग्राम सुनैचा की घटना है जहाँ पर एक प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक ही अपने सामने एक विद्यार्थी को पिटते देखते रहे और जब परिजनो ने उलाहना दिया तो अध्यापक ने छुआ-छूत की बात कर घर मे बच्चे को बिठा लेने की बात कही।

बता दें कि पूरा माजरा क्या है?
प्राप्त जानकारी से पता चला है कि ग्राम सुनैचा थाना कबरई की घटना है, जहाँ पर प्राथमिक विद्यालय सुनैचा मे कक्षा 3 मे पढ रहा पीड़ित बालक राममिलन(8) पुत्र भवानीदीन को कल विद्यालय मे ही अलग कक्षा पांच मे पढ रहा लडका धाकड(12) पुत्र लल्ला सिंह ने राममिलन को आकर मारने लगा। राममिलन का कुसूर इतना है की वह छोटी जाति का है। बालक राममिलन का कहना है कि उक्त लडके धाकड ने आकर पूछा कि तुम बसोर हो क्या तुम हमारी शादी मे बाजा बजाओगे? बालक ने उस बात पर मना कर दिया तो उक्त लडके ने मारपीट शुरु कर दी व उठाकर पटक दिया, जिससे बालक के सिर पर छोट आई है| बालक से परिजन ने पूछा कि तुमने वहाँ उपस्थित अध्यापक से शिकायत क्यों नहीं की तो उसने बताया की अध्यापक खुद वहाँ मौजूद हो मारपीट देखते रहे, उन्होनें एक बार भी उस लडके को मना नहीं किया| यह सुन परिजन ने विद्यालय मे जाकर अध्यापक से उलाहना दिया तो वह छुआ-छूत की बात करते हुऐ परिजनो से कहा कि आप अपने बालक को घर बिठा लो|

ऐसी बात व मारपीट को लेकर परेशान परिजन ले कबरई थाना मे शिकायत दर्ज कर न्याय की मांग की| कबरई थानाध्यक्ष ने कार्यवाही का आश्वासन दिया और उन्हें जाने को कहा। बताइऐ जब इस तरह के अध्यापक ऐसी सोच रखेंगे तो शिक्षा से बच्चे वंचित रह जाऐंगे। एक तरह मोदी सरकार सबका साथ व विकास की बात करती है और दूसरी तरफ छुआ-छूत को खत्म करने की बात कहती है लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम की उनकी राज मे ऐसी गंदी सोच वाले अध्यापको के चलते यह तो संभव नहीं है, जरा ध्यान दें योगी व मोदी सरकार। क्या उस बच्चे का यह जाति कुसूर है या फिर अध्यापक की गंदी सोच क्योंकि अध्यापक सबके लिऐ बराबर है और उसे तो जात पात पर तो बिल्कुल भी नहीं जाना चाहिए बडी निंदा की बात है।

रिपोर्ट- प्रदीप मिश्रा

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