अपहरण के बाद 14 दिन बाद मां का आंचल पाकर खिलखिलाया अंकित

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देहरादून(ब्यूरो)- अनाथों की तरह संप्रेक्षण गृह में 12 दिन गुजारने के बाद जब अंकित ने मां राजकुमारी को देखा तो दौड़ कर उसके गले से लिपट गया। राजकुमारी भी 14 दिन बाद कलेजे के टुकड़े को सामने देखकर फफक पड़ी। ये आंसू मां की उस ममता की कहानी कह रहे थे, जिसके चलते राजकुमारी ने कई दिनों से खाना-पीना छोड़ रखा था।गत दिवस को पुलिस ने अंकित को सहारनपुर से सकुशल बरामद कर लिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने अंकित को उसके पिता सुरेश साहनी और मां राजकुमारी के सुपुर्द किया। इसके बाद एसएसपी ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। चार साल के अंकित का अपहरण दो जुलाई की दोपहर राजीव साहनी पुत्र रामश्री साहनी निवासी बुधकारा थाना कटरा मुजफ्फरपुर (बिहार) व काला साहनी उर्फ लाला पुत्र पलधारी निवासी जहांगीरपुर थाना गायघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) ने किया था। दोनों अंकित को लेकर दिल्ली निकल गए। मगर, दिल्ली पहुंचने से पहले ही उन्हें पता चल गया कि अंकित के अपहरण की जानकारी पुलिस को हो गई है। पकड़े जाने के डर से उन्होंने अंकित को तीन जुलाई को दिल्ली में हरिद्वार आने वाली एक ट्रेन में बैठा दिया। साथ ही सुरेश के पड़ोसी अकलू साहनी को फोन पर बताया कि वह अंकित को लेकर ट्रेन से हरिद्वार आ रहे हैं। वहीं, अंकित तीन जुलाई को देर शाम सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर उतर गया। यहां वह जीआरपी के एक सिपाही को रोते हुए मिला तो सिपाही उसे जीआरपी थाने ले आया। यहां उसे चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया गया। सहारनपुर में बाल संरक्षण गृह न होने के कारण चाइल्ड हेल्प लाइन ने चार जुलाई को अंकित को रामपुर जिले के बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया।

ऐसे मिला अंकित-
शनिवार को सोशल मीडिया पर अंकित की फोटो अपलोड किए जाने के बाद दून पुलिस के पास सहारनपुर जीआरपी का फोन आया कि अंकित उनके यहां मिला था। शनिवार देर शाम टीम सहारनपुर पहुंची और जीआरपी के साथ रामपुर पहुंची, जहां संप्रेक्षण गृह में अभिलेखीय औपचारिकता पूरी कराने के बाद अंकित को बरामद कर लिया गया।

कब-क्या हुआ-
2 जुलाई: दोपहर एक बजे अंकित का अंबेडकरनगर बस्ती से अपहरण हुआ।
3 जुलाई: काला के फोन के बाद दून पुलिस देर रात तक हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर डेरा डाले रही, मगर न तो अंकित पहुंचा न काला और राजीव।
4 जुलाई: काला की लोकेशन दिल्ली में मिली। पुलिस दिल्ली पहुंची, मगर वह हरियाणा चला गया।
5 जुलाई: बिहार पहुंची पुलिस टीम ने राजीव को पकड़ा। उसने बताया कि काला बच्चे के साथ हरियाणा के झज्जर में है।
6 जुलाई: हरियाणा में पुलिस टीम ने काला को पकड़ा, मगर अंकित नहीं मिला। इसी दिन राजीव को पुलिस ने जेल भेजा।

12 जुलाई: पटेलनगर के नया गांव में अज्ञात बच्चे का शव मिला, लेकिन अंकित के परिजनों ने शिनाख्त नहीं की।
14 जुलाई: अंकित का फोटो और हुलिया सोशल मीडिया के जरिये उप्र के सभी जिलों में प्रसारित किया गया।
15 जुलाई: सहारनपुर जीआरपी ने दून पुलिस को फोन पर अंकित के सुरक्षित होने की जानकारी दी।

सोशल मीडिया बना मददगार- 
सोशल मीडिया ने अंकित की बरामदगी में अहम भूमिका निभाई। चार जुलाई से रामपुर बाल संप्रेक्षण गृह में अनाथों की तरह जिंदगी गुजार रहे अंकित का पता, सोशल मीडिया पर उसकी फोटो और डिटेल प्रसारित करने के बाद ही चला। अगर पुलिस सोशल मीडिया की मदद न लेती तो शायद अंकित अब भी वहीं होता।

पुलिस टीम को ढाई हजार का इनाम-
अंकित की सकुशल बरामदगी पर एसएसपी ने सीओ सिटी चंद्रमोहन सिंह, कोतवाल बीबीडी जुयाल, एसएसआइ अरविंद कुमार व एसआइ अरविंद चौधरी समेत एसओजी की टीम के काम की सराहना करते हुए ढाई हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

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