पाॅलीथिन प्रयोग पर रोक लगने के बाद पाॅलीथीन ने बढाई गन्दगी, पाॅलीथीन थैलियोें की बिक्री अब भी जोरों पर

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प्रतीकात्मक


मैनपुरी(ब्यूरो)
– कुरावली सरकार द्वारा पाॅलीथिन प्रयोग पर रोक लगाये जाने का अभियान तो चला और अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया । तभी तक मालूम पड़ा कि पाॅलीथिन थैलियों को जगह दुकानदार कागज की थैलीयों में ग्राहकों को सौदा दे रहे है। अब पाॅलीथिन का प्रयोग पुनः तेजी से पकड़ रहा है और कुरावली क्षेत्र में तो कागज की थैली का प्रयोग न के बराबर है । वहीं पाॅलीथिन थैजी का प्रयोग चर्म सीमा पर हो गया है । उल्लेखनीय है कि पाॅलीथिन थैली का प्रयोग किये जाने के पष्चात उसे खुली जगहोें में फैक दिया जाता है । जो कूडे के ढेरों से खेतों में पहुंच रही है। मिट्टी की उर्वरा षक्ति को क्षीण कर ही रही है । साथ में खेतों चरने वाले पषुओ के पेट में भी पहुंच रही है । जो पेट मेें न गलने के कारण पषुओं में जान लेवा रोगों को वढा रही है ।

नगर में आम रास्तों पर फैंक दिये जाने वाली पाॅलीथिन थैलिया व चाय, जूस आदि की की दुकानों से फैके जाने वाले प्लास्टिक के ग्लासों से रोड के किनारे व गलियों की नालियों में जाने से गन्दगी को बढावा मिल रहा है।वहीं नालों के रूक जाने से कीचड़ बजबजाने लगता है और उनके गन्दे पानी का बहाव भी रूक जाता है । और नाले नालियों में कीचड़ से उबाल पैदा होकर बदबू को बढा देता है । उन नालों से होकर राहगीरों का निकलना दूभर हो जाता है । जो बुद्धि जीवी लोग पाॅलीथिन में रखी व प्लास्टिक के गिलासों व कटोरियों में रखे खाद्य पदार्थ को पसंद नहीं करते है । उनको प्लास्टिक व पाॅलीथिन की गन्दगी के पास खडा होना भी दुसवार हो रहा है । लेकिन नगर में बढ रही गन्दगी थामे नहीं थम रही है ।

नगर के डा0 गिरीष रावत, धीरसिंह वर्मा, नरेन्द्र सिंह राठौर, चन्द्रसेन गुप्ता, अषोक दिवाकर, पीतम सिंह वर्मा, रविपाल, रामसेवक, रमांषंकर षर्मा, डा0 मन्जूर अहमद, धर्मेन्द्र गुप्ता, दुर्गेष गुप्ता, अमलेष कठेरिया, वेदप्रकाष व नेहरू, ओमषंकर, रविकेष सक्सैना, लाला मदन लाल वर्मा, आदि बुुद्धि जीवी वर्ग ने षीघ्र से षीघ्र पाॅलीथिन पर रोक लगाये जाने मी मांग की है।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा
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