पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद उड़ी पुलिस के बयान की धज्जियाँ

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रायबरेली(ब्यूरो)- प्रदेश में अपराधियों के मन से पुलिस और कानून का खौफ इस कदर गायब है तथा पुलिस की कार्यप्रणाली कितनी लचर और अपराधियों के मनोबल को बढ़ाने वाली है, यह ऊचाहार में पांच लोगों को दरिंदगी के साथ मारने और मारकर तथा कुछ को जिंदा ही जला डालने की घटना से समझा जा सकता है। आरोपियों की गढ़ी हुई कहानी और पुलिस की शुरूआती तहकीकात जो पुलिस ने पत्रकारों को बताई उसकी मौके पर मौजूद तथ्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा सामने आने से बचने वाले प्रत्यक्षदर्शियों के बयान की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

शुरू में आरोपियों ने घटना को अंजाम देने के बाद बहुत ही ठण्डे दिमाग से बनाई हुई योजना के तहत पुलिस और कुछ चुनिंदा पत्रकारों को खुद ही सूचना दी। सूचना के मुताबिक मृतक आरोपियों के यहाँ हत्या के इरादे से पहुंचे थे। परंतु आरोपियों के परिजनों और गांव वालों की सतर्कता के कारण वह वहा से भागने को मजबूर हो गये। गांव की भीड़ ने उन्हें दौड़ाया तो उनकी गाड़ी बिजली के खम्भे से टकराई और पलट गयी। बिजली के तार टूटने के कारण गाड़ी में आग लग गयी और सभी सवार मय गाड़ी के खाक हो गये।

यह कहानी थोड़ी देर को लोगों को भ्रम में रखने में सफल रही। मगर यह जो मामले की तह में पहुंचने की कोशिश की गयी कहानी की हकीकत सामने आने लगी। जिस बिजली के खम्भे से सफारी के टकराने की बात बताई जा रही थी। उस खम्भे के पांच टुकडे मौक ए वारदात पर पड़े हुये हैं। जली हुई सफारी के टकराने से बिजली आरसीसी पोल इतनी बुरी तरह नहीं टूट सकता। यदि सफारी पोल से टकराई होती तो सफारी का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त होता। परंतु ऊचाहार थाने में खड़ी जली हुई सफारी के आगे का बम्फर कहीं से टकराने का संकेत नहीं दे रहा है। बल्कि अपनी वास्तविक स्थिति में गाडी में लगा हुआ है। जिन तीन तारों में बिजली का प्रवाह रहता है वह तार नहीं टूटे हैं। बल्कि अर्थ वायर टूटा है तथा उसके ऊपर लपेटी हुई घरेलू बिजली की एक पतली केबिल भी टूटी है। जानकारों का कहना है कि इन दोनों तारों के टूटने से गाड़ी में आग नहीं लग सकती है। सूत्रों का कहना है कि जिस समय की घटना बताई जा रही है उस समय संबंधित लाइन में बिजली नहीं आ रही थी। अतः इस तथ्य से भी साफ है कि बिजली के पोल से न तो सफारी टकराई और न ही तार टूटने से उसमें आग लगी।

मौक ए वारदात पर एक जोड़ी बिना जले स्पोर्ट्स जूते और बिना जली चप्पल पड़े हुये थे। जिनके बारे में बताया गया कि यह जूते-चप्पल मृतकों के हैं। यदि सभी मृतक जलकर मरे तो उनके जूते-चप्पल बिना जले कैसे रह गये। मृतकों की गाड़ी और उनके पास से किसी तरह का कोई असलहा भी बरामद नहीं हुआ। आरोपियों द्वारा यह बताया जाना कि मृतक उनके यहां हत्या के इरादे से आये थे और उनके घर पर फायरिंग भी की। परंतु जब मृतकों के पास असलहे नहीं थे तो उन्होने फायरिंग कैसे की। साफ जाहिर है कि यह तथ्य भी मनगढ़ंत है।

रिपोर्ट- राजेश यादव 

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