आयोग की सख्ती के बाद 01 साल बाद दी, लाइसेंसी रिवाल्वर की जानकारी

 लखनऊ/रायबरेली (ब्यूरो)- सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत मुरादाबाद निवासी श्री पवन अग्रवाल ने दिनांक 13.06.2016 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुरादाबाद को एक्ट के तहत आवेदन देकर कुछ बिन्दुओं की जानकारी चाही कि एफ0आई0आर0 नं0-218 दिनांक 10.06.2016 के अन्तर्गत धारा-385 थाना पाकबड़ा पर जो मुकदमा पंजीकृत हुआ, उस प्रकरण में प्रार्थी को दिनांक 10.06.2016 को कितने बजे व किस स्थान से गिरफ््तार किया गया व प्राथी के पास पुलिस ने जो सामान बरामद किया उसको किस अधिकारी के सुपुर्द किया गया, एवं उक्त सामान को कहाॅ रखा गया, गिरफ्तारी के उपरान्त जिस आधार/अधिनियम की धारा के अन्तर्गत वादी को छोड़ा गया, तथा प्रार्थी को पुनः वापिस किये गये सामनों का लिखित ब्यौरा व आदि से सम्बन्धित बिन्दुओं की प्रमाणित छायाप्रतियाॅ उपलब्ध करायी जाये, मगर इस सम्बन्ध में पुलिस विभाग द्वारा वादी को कोई जानकारी नहीं दी गयी है।

अधिनियम के तहत कोई जानकारी न मिलने पर वादी ने राज्य सूचना आयोग में अपील दाखिल कर प्रकरण की विस्तृत जानकारी चाही है। राज्य सूचना आयुक्त श्री हाफिज उस्मान ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुरादाबाद को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 20 (1) के तहत नोटिस जारी कर आदेशित किया कि वादी के प्रार्थना-पत्र की सभी सूचनाएं वादी को अगले 30 दिन के अन्दर उपलब्ध कराते हुए, मा0 आयोग को अवगत कराये, अन्यथा जनसूचना अधिकारी स्पष्टीकरण देंगे कि वादी को सूचना क्यों नहीं दी गयी है, क्यों न उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाये। इस सम्बन्ध में वादी का कथन है कि पुलिस विभाग द्वारा मेरा लाइसेंस मेरी पत्नी को दिया जाना दिखाया गया। इस सम्बन्ध में आर0टी0आई0 लगायी गयी।

राज्य सूचना आयुक्त श्री हाफिज उस्मान द्वारा आदेश दिये गये, तब पुलिस विभाग ने लिखकर दिया कि आपका लाइसेंसी रिवाल्वर सुपुर्दगीनामा नहीं दिया गया था, जो लगभग 01 साल बाद लिखित तौर पर बताया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुरादाबाद से श्री अश्वनी कुमार शर्मा उपनिरीक्षक, उपस्थित हुए, उनके द्वारा मा0 आयोग को बताया गया कि आवेदक द्वारा लाईसेन्सी शस्त्र (रिवाल्वर .22 बोर, 07 कारतूस जिन्दा मय शस्त्र लाइसेंस एवं 03 अदद मोबाइल फोन व अन्य) जिसको कब्जा पुलिस में लिया गया था, बाद में आपकी धर्म पत्नी श्रीमती शुभ्रा अग्रवाल को रिवाल्वर .22 वापस कर दिया गया था।

किसी भी वस्तु का कब्जे में लेने व देने पर प्रथम वैधानिक कर्तव्य होता है कि उस वस्तु को कब्जे में लेने की फर्द व सुपुर्दगी में देने का सुपुर्दगीनामा तैयार करे, सम्भवतः विवेचक द्वारा ऐसा नहीं किया गया, चूंकि मुकदमें की केस डायरी थाने में उपलब्ध नहीं थी, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मांगे गये सुपुर्दगीनाम के विषय में केस डायरी में संलग्न होना बताया गया था, पर ऐसा नहीं हुआ। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सुपुर्दगीनामा तैयार नहीं किया गया है, जबकि सूचना आयुध अधिनियम-1959 की धारा 03 व 1962 के अन्तर्गत कोई भी पुलिस अधिकारी को शस्त्र धाराक के उपस्थित होते हुए, उसका शस्त्र किसी अन्य को नहीं दिया जा सकता है, विवेचक द्वारा आवेदक का शस्त्र नियमानुसार सुपुर्दगीनामा तैयार करके दिया जाना था, जो नहीं दिया गया।

मोनिका रस्तोगी (तृतीय पक्ष) ने आयोग को दी जानकारी मेरा पति मेरी सूचनाएं मांग कर मुझे, फंसाना चाहता — एक अन्य वाद में मुरादाबाद निवासी श्री उमेश कुमार सिंह ने सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत प्रधानाचार्य आर0एस0डी0 पब्लिक स्कूल, मुरादाबाद दिनांक 05.04.2016 को आवेदन-पत्र देकर निम्न जानकारी मांगी थी कि मोनिका रस्तोगी पुत्री महेश चन्द्र रस्तोगी आर0एस0डी0 पब्लिक स्कूल में किस पद पर, कितने वर्षाें से कितना वेतन पा रही है, आदि की प्रमाणित छायाप्रतियां उपलब्ध करायी जाये। इस सम्बन्ध में कोई जानकारी न मिलने पर वादी ने राज्य सूचना आयोग में अपील दाखिल कर जानकारी चाही है।

राज्य सूचना आयुक्त श्री हाफिज उस्मान ने प्रधानाचार्य आर0एस0डी0 पब्लिक स्कूल, मुरादाबाद को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 20 (1) के तहत नोटिस जारी कर आदेशित किया, तब श्री वेद प्रकाश एवं मोनिका रस्तोगी (तृतीय पक्ष) सुनवाई के दौरान मा0 आयोग में उपस्थित हुए। उनके द्वारा बताया गया कि मेरा अपने पति श्री उमेश कुमार (वादी) से मेरा पारिवारिक विवाद चल रहा है, जिसके कारण मेरे पति द्वारा सूचनाएं मांग कर मुझे परेशान किया जा रहा है, जबकि मैं अपनी बेटी के साथ अलग रह रही हॅू, और एक छोटी सी नौकरी कर अपना व अपनी बेटी का भरणपोषण कर रही हॅू। मेरी आय की जानकारी पाकर मेरा पति, मेरी बेटी का अहित कर सकता है, इसलिए मेरा व मेरी बेटी के भविष्य को देखते हुए, इसकी जानकारी वादी को न दी जाये|

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