राम का अयोध्या में जन्म लेना यदि आस्था का मामला है तो तीन तलाक क्यों नहीं: कपिल सिब्बल

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नई द्दिल्ली- देश की सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए पूरी तरह से अब कमर कस ली है | आज मंगलवार को भी यहाँ पर ट्रिपल तलाक के मामले पर सुनवाई जारी है | इसी दौरान आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से अदालत में पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने कहा है कि यदि राम जी का अयोध्या में जन्म लेना आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक आस्था का विषय क्यों नहीं हो सकता है |

आपको बता दें कि इन दिनों तीन तलाक के मामले की गंभीरता को देखते हुए देश की सर्वोच्च न्यायालय में लगातार उक्त मामले पर सुनवाई जारी है | गुरूवार से शुरू हुई सुनवाई आज मंगलवार तक जारी रही | इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुवाई वाली 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच कर रही है | इस बेंच की सब से बड़ी खासबात यह है कि इस बेंच में हिन्दू, सिख, पारसी, इसाई और मुस्लिम सभी पाँचों प्रमुख धर्मों के मानने वाले जज सम्मिलित है |

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि तीन तलाक जैसी प्रथा को ख़त्म कर दिया जाता है तो मुस्लिम पुरुषों के लिए क्या व्यवस्था होगी ?

कोर्ट के इस सवाल का जवाब देते हुए केंद्र सरकार की तरफ एजी मुकुल रोहतगी ने कहा है कि यदि ट्रिपल तलाक को समाप्त कर दिया जाएगा तो केंद्र सरकार इस मामले पर एक बिल लेकर आएगी |

कुछ अहम् सवालों के जवाब ढूढ़ रही है सुप्रीमकोर्ट –
बता दें कि फिलहाल इस पूरी सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट अपने कुछ सवालों के जवाब ढूढने की कोशिश कर रही है | इन सवालों में आपको बता देते है कि सुप्रीमकोर्ट यह जानना चाहती है कि,

धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत क्या तीन तलाक, हलाला और बहु विवाह की इज़ाज़त संविधान के तहत दी जा सकती है या नहीं ?

समानता का अधिकार और गरिमा के साथ जीने का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में प्राथमिकता किसको दी जाए?

पर्सनल लॉ को संविधान के अनुछेद 13 के तहत कानून माना जाएगा या नहीं?

क्या तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-विवाह उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही है, जिस पर भारत ने भी दस्तखत किये हैं?

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