सपा की अंदरूनी कलह से परेशान अखिलेश यादव, नई पार्टी बना भाजपा में हो सकते हैं शामिल ?

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The Prime Minister, Shri Narendra Modi meeting the Chief Minister of Uttar Pradesh, Shri Akhilesh Yadav on the drought situation in various parts of Uttar Pradesh, in New Delhi on May 07, 2016.

अपने ही घर और पार्टी में बेगाने हो चुके मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भाजपा को कुछ अधिक ही प्रेम हो गया है। भाजपा के इस प्रेम के तमाम निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। राजनितिक विश्लेषक तो अब सपा विभाजन के कयास लगा रहे हैं। माना जा रहा है की भाजपा अखिलेश को अपने पाले में ला सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सपा मुखिया मुलायम सिंह की लुटिया ही डूब जाएगी।

भाजपा को यूपी में एक दमदार चेहरे की तलाश है जो जनता को भाजपा के पाले में लाकर खड़ा कर सके। कम से कम भाजपा में फ़िलहाल कोई ऐसा चेहरा नहीं है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह हों या केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र अब भीड़ उनके पीछे खड़ी होती नहीं दिखती। रही बात योगी आदित्यनाथ और वरुण गांधी की तो उन्हें पार्टी के कद्दावर नेता पचा नहीं पा रहे। ऐसे हालात में भाजपा युवा जोश वाले किसी नेता के सहारे सत्ता में वापसी चाहती है। अखिलेश यादव का अपने ही परिवार में विरोध है, पापा मुलायम ने तरजीह देना बन्द कर दिया है तो बड़े भाई का साथ मिला तो शिवपाल यादव अखिलेश के पर कतरने में जुट गए हैं।

पहले अखिलेश पर जान छिड़कने वाले समर्थक एमएलसी को पार्टी से बाहर किया, इसके बाद मुख्यमंत्री के पसंदीदा प्रत्याशियों के टिकट काट दिए। मुख्यमंत्री के खासमखास राजेन्द्र चौधरी की प्रवक्ता पद से छुट्टी और बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी के कौमी एकता दल का सपा में विलय कराकर शिवपाल सिंह ने अखिलेश यादव को करारा झटका दिया है। ऐसे में माना जा रहा है की अपनों से मिल रहे दर्द से निजात पाने की दवा अखिलेश यादव ढूढ़ रहे हैं। उन्हें भी दोबारा मुख्यमंत्री बनना है ऐसे भाजपा के साथ वे जा सकते हैं, इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा को भी अखिलेश से अच्छा कोई दूसरा चेहरा नहीं मिलेगा।

सपा से जुड़े सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव नई पार्टी बनाकर भाजपा से गठजोड़ कर सकते हैं। अखिलेश के दामन पर कोई दाग नहीं है। स्वच्छ छवि, बेदाग चेहरा और विकास पुरुष का मिला तमगा उन्हें दोबारा सत्ता में पहुंचा सकता है। यही वजह है की अगर अखिलेश सपा को तोड़कर आते हैं तो भाजपा उन्हें अपनाने में गुरेज नहीं करेगी। भाजपा से जुड़े एक नेता की माने तो मोदी और अखिलेश के दम पर भाजपा सूबे की सत्ता में काबिज हो सकती है। कयासों को बल मिलना लाजिमी है। आज कोई भी बड़ा भाजपा नेता अखिलेश की बुराई नहीं कर रहा।

कानपुर में 4 अक्टूबर को मेट्रो प्रोजेक्ट के शिलान्यास समारोह का जिक्र करना जरूरी है। मंच पर प्रधानमन्त्री मोदी और अखिलेश यादव की तस्वीर लगी थी। मैदान में सिर्फ और सिर्फ सपा का झंडा लिए सपा कार्यकर्ता दिख रहे थे। अखिलेश यादव जिंदाबाद का नारा गूंज रहा था और इन सबके बीच शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू का यह कहना की केंद्र में मोदी और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव करेंगे विकास। उनके इस वाक्य ने सबको हैरत में डाल दिया था। इसी मंच से भाजपा नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी द्वारा अखिलेश यादव की तारीफ भी की गई। सभा खत्म होने के साथ ही भाजपा और अखिलेश यादव में कुछ न कुछ खिचड़ी पकने के कयास लगने लगे थे। मुख्यमंत्री द्वारा बार बार यह कहना कि तुरुप का इक्‍का उनके पास है’ के भी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। सपा टूटेगी या नहीं अखिलेश यादव भाजपा के साथ जायेंगे या नहीं यह वक्त बताएगा पर अखिलेश पर भाजपा नेताओं का प्रेम सपा और भाजपा नेताओं के बीच चर्चा जरूर बना हुआ है।

विचार – वशिष्ठ चौबे

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